

संवेदनशील शिक्षक बच्चों में सम्मान और सुरक्षा की भावना जगाते हैं। सबसे गरीब पृष्ठभूमि के छात्र भी शिक्षा की शक्ति से ऊंचाइयों को छू सकते हैं।”
नेहा पाठक
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में देशभर के 45 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि स्मार्ट ब्लैकबोर्ड और स्मार्ट क्लासरूम अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सबसे जरूरी हैं स्मार्ट शिक्षक, जो संवेदनशीलता और समर्पण के साथ बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों का योगदान भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने में निर्णायक होगा। उन्होंने कहा, “शिक्षा भोजन, वस्त्र और आवास जितनी ही आवश्यक है। संवेदनशील शिक्षक बच्चों में सम्मान और सुरक्षा की भावना जगाते हैं। सबसे गरीब पृष्ठभूमि के छात्र भी शिक्षा की शक्ति से ऊंचाइयों को छू सकते हैं।”
उन्होंने अपने शिक्षक जीवन को याद करते हुए कहा कि वह उनके जीवन का सबसे सार्थक दौर था। राष्ट्रपति ने शिक्षकों से अपील की कि वे विशेष रूप से कमजोर पृष्ठभूमि और लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान दें।
राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। उन्होंने कहा कि यह नीति कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार और वंचित वर्ग की लड़कियों को शिक्षा के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराने पर जोर देती है।

इस अवसर पर पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय, रानी कर्णावती (जनपद मीरजापुर) की प्रधानाध्यापिका मधुरिमा तिवारी को भी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मधुरिमा तिवारी ने अपनी मेहनत और लगन से विद्यालय को एक आधुनिक और हरा-भरा संस्थान में बदल दिया। उनके प्रयासों से विद्यालय को ‘हरित विद्यालय पुरस्कार’ भी मिला, जिसकी सराहना स्वयं राष्ट्रपति ने की।



