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लखनऊ रैली में मायावती का सपा पर हमला, CM योगी की प्रशंसा; 2027 में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

  • अखिलेश कुमार अग्रहरि / शालिनी शर्मा

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में आयोजित एक बड़ी रैली में समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर निशाना साधा, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की नीतियों की सराहना की। कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित इस रैली में मायावती ने साफ कर दिया कि बीएसपी 2027 के विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी।

मायावती ने अपने संबोधन में सपा पर आरोप लगाया कि वह दलित आइकनों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए करती है। उन्होंने कहा,

“सरकार में रहते हुए यह पार्टी न तो पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को याद करती है, न ही संतों और आंदोलन से जुड़े महान व्यक्तित्वों को। लेकिन जैसे ही सत्ता से बाहर होती है, इन्हीं नामों का सहारा लेने लगती है।”

बीएसपी प्रमुख ने कहा कि सपा सरकार ने उनके शासनकाल में बनाए गए कांशीराम नगर जिले का नाम बदलकर कसगंज रख दिया, जो दलित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा,

“अगर अखिलेश यादव वास्तव में कांशीराम जी का सम्मान करते, तो जिले का नाम कभी नहीं बदलते। हमने उनकी याद में विश्वविद्यालय और योजनाएं शुरू कीं, लेकिन सपा सरकार ने उन्हें बंद कर दिया।”

योगी सरकार को दिया श्रेय

मायावती ने अपने भाषण में योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने उनके शासनकाल में बनाए गए पार्कों और स्मारकों के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाई है।

“मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था कि स्मारकों से मिलने वाली टिकट की आमदनी केवल रखरखाव में ही खर्च की जाए। भाजपा सरकार ने इस पर भरोसा दिलाया और वह वादा निभाया। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री और उनकी सरकार की आभारी हूं।”

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बाद में एक्स पर प्रतिक्रिया दी —

“उनकी अधूरी सांठगांठ है जारी, इसलिए ज़ुल्म करने वालों के आभारी।”
इस टिप्पणी को सपा और बीएसपी के बीच संभावित अंदरूनी समझौते के संकेत के रूप में देखा गया।

“बीएसपी 2027 में अकेले लड़ेगी”

मायावती ने ऐलान किया कि बीएसपी आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

“जब भी हमने गठबंधन में चुनाव लड़ा, हमें कोई लाभ नहीं मिला। 2007 में जब हमने अकेले सरकार बनाई, तब जनता के कल्याण के लिए किए गए कार्यों से हमारा प्रभाव पूरे देश में बढ़ा। यही वजह है कि जातिवादी और पूंजीवादी दल हमें रोकने के लिए गुप्त रूप से एकजुट हो गए।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस, भाजपा और सपा — तीनों ने हर चुनाव में “बीएसपी को रोकने की रणनीति” बनाई और हमारे वोट बैंक को कमजोर करने की कोशिश की।

आकाश आनंद को लेकर दिया बड़ा संदेश

रैली में मायावती के भतीजे और बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद के पोस्टर और बैनर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। मंच से मायावती ने उनके नेतृत्व की खुलकर तारीफ की और पार्टी कार्यकर्ताओं से उनके समर्थन की अपील की।

“आकाश आनंद ने आंदोलन में फिर से सक्रिय भागीदारी शुरू की है। मैं उन्हें उसी तरह आगे बढ़ा रही हूं, जैसे कांशीराम जी ने मुझे बढ़ाया था। आप सभी हर परिस्थिति में उनका समर्थन करें।”

आकाश आनंद ने अपने संबोधन में कहा कि पार्टी 2007 जैसी जीत दोहराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

“हम 2027 का चुनाव उसी ताकत से लड़ेंगे, जैसे हमने 2007 में लड़ा था — अकेले और बहुमत के साथ।”

विश्लेषण

लखनऊ की यह रैली न केवल बीएसपी के लिए राजनीतिक पुनर्संगठन का संकेत है, बल्कि मायावती के उत्तराधिकारी के रूप में आकाश आनंद की औपचारिक वापसी का भी ऐलान थी। एक तरफ जहां उन्होंने भाजपा से सहमति और सपा से विरोध का संतुलन साधा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया कि बीएसपी अब किसी के सहारे नहीं, बल्कि अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी।

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