लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान जंतर-मंतर आंदोलन, कथित पुलिस कार्रवाई और छात्रों की मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नेहा पाठक
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की मैनपुरी से सांसद डिम्पल यादव ने लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने आंदोलन की सफलता के लिए छात्रों, युवाओं और जेन-जी को बधाई देते हुए कहा कि देश के युवाओं ने बिना डरे अपनी आवाज बुलंद की और अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया।
डिम्पल यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर एक महीने तक शांतिपूर्ण आंदोलन चला, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से छात्र-छात्राएं और युवा शामिल हुए। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी ने इस आंदोलन का पूरा समर्थन किया और पार्टी के युवा सांसद भी आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं 18 जून को जंतर-मंतर पहुंचीं, जहां अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक और अन्य छात्रों से मुलाकात की।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सरकार ने अन्याय किया। उनके अनुसार 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पहुंचे थे। छात्रों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ कठोर व्यवहार किया गया।
डिम्पल यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बर्बरता की गई। उन्होंने कहा कि जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर छात्रों को रोका गया और उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई छात्र घायल हुए, कई बेहोश हो गए और छात्राओं के साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बताते हुए सरकार की कार्रवाई की आलोचना की।
सांसद ने कहा कि छात्रों और युवाओं के आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं द्वारा प्रदर्शनकारियों को अराजक तत्व बताए जाने से देश का युवा वर्ग आहत हुआ है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान डिम्पल यादव ने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक है तथा उसकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के बजाय उसे गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।


