
नवोदय स्थापना दिवस पर बोले पोस्टमास्टर जनरल, ‘पे बैक टू सोसाइटी’ का दिया संदेश
- प्रतीक कुमार
अहमदाबाद। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को साकार करते हुए नवोदय विद्यालय न केवल शिक्षा बल्कि संस्कारों का भी संदेश दे रहे हैं। यह विचार कृष्ण कुमार यादव ने नवोदय स्थापना दिवस के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि देशभर में नवोदय विद्यालय के 17 लाख से अधिक पूर्व विद्यार्थियों का सशक्त नेटवर्क समाज को नई दिशा देने के लिए तत्पर है।
जवाहर नवोदय विद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल 1986 को दो विद्यालयों से शुरू हुआ यह सफर आज 661 विद्यालयों तक पहुँच चुका है और अपनी स्थापना के 40 वर्ष पूरे कर रहा है। आज नवोदय विद्यालय अपनी उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली और बेहतर परीक्षा परिणामों के कारण देश के शीर्ष संस्थानों में शामिल है।
अपने अनुभव साझा करते हुए कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि नवोदय विद्यालय में बिताया समय उनके जीवन का अहम आधार रहा। वर्ष 2001 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में चयन के बाद उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि यदि नवोदय का साथ न मिला होता तो शायद वे इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाते।
उन्होंने कहा कि नवोदय ने विद्यार्थियों को सिखाया कि सपने केवल देखे नहीं जाते, बल्कि अनुशासन, संघर्ष और समर्पण से उन्हें साकार किया जाता है। नवोदय से निकले छात्रों ने राजनीति, प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, सैन्य सेवाओं, शिक्षा और व्यवसाय जैसे विभिन्न क्षेत्रों में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है।
उन्होंने ‘पे बैक टू सोसाइटी’ का आह्वान करते हुए कहा कि नवोदय ने सभी को बहुत कुछ दिया है, अब समाज को लौटाने की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों ने जिस ऊंचाई को हासिल किया है, उसका श्रेय नवोदय की समानता और समरसता की भावना को जाता है, जहाँ जाति, धर्म, अमीरी-गरीबी जैसे भेदभाव से ऊपर उठकर शिक्षा दी जाती है।
अंत में उन्होंने कहा कि नवोदय आज एक ब्रांड बन चुका है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सामाजिक मूल्यों, पर्यावरण जागरूकता, साहसिक गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा को भी बढ़ावा देता है। नवोदय का आदर्श वाक्य “प्रज्ञानं ब्रह्म” इसकी ज्ञान-केन्द्रित शिक्षा प्रणाली और उज्ज्वल भारत निर्माण के संकल्प को दर्शाता है।


