सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश पर बार काउंसिल का बड़ा एक्शन

वकील राकेश किशोर की वकालत पर तत्काल प्रभाव से रोक, 15 दिन में देना होगा जवाब
नेहा पाठक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-1 में भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने सख्त कार्रवाई की है। बीसीआई ने दिल्ली के अधिवक्ता राकेश किशोर को प्रैक्टिस से तत्काल निलंबित कर दिया है।
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह कृत्य अधिवक्ता अधिनियम, 1961 तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियमों का गंभीर उल्लंघन है। इन नियमों के अनुसार, अधिवक्ताओं को न्यायालय में गरिमा और अनुशासन बनाए रखना तथा न्यायपालिका के प्रति सम्मान प्रदर्शित करना आवश्यक है।
देशभर में वकालत पर लगी रोक
बीसीआई ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि राकेश किशोर अब भारत के किसी भी न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष न तो पैरवी कर सकते हैं और न ही किसी भी प्रकार की वकालत संबंधी गतिविधि कर सकेंगे। निलंबन अवधि के दौरान उनके सभी पहचान पत्र, प्रवेश पास और बार एसोसिएशन से जुड़े अनुमति पत्र निष्क्रिय रहेंगे।
दिल्ली बार काउंसिल को अनुपालन का निर्देश
बीसीआई ने दिल्ली बार काउंसिल को तत्काल प्रभाव से अधिवक्ता की स्थिति को अपने रिकॉर्ड में अद्यतन करने और यह जानकारी अपने अधिकार क्षेत्र की सभी अदालतों व न्यायाधिकरणों को भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट, सभी उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों को भी आदेश की प्रति प्रसारित करने को कहा गया है।
15 दिन में देना होगा जवाब
बीसीआई ने इसे अंतरिम आदेश बताते हुए कहा है कि अधिवक्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाएगी। किशोर को 15 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा, जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि निलंबन क्यों न जारी रखा जाए।
न्यायालय की गरिमा सर्वोपरि: बीसीआई
बीसीआई ने कहा कि अधिवक्ता द्वारा कोर्ट की कार्यवाही के दौरान जूता फेंकने की कोशिश न्यायालय की गरिमा के खिलाफ है और यह अधिवक्ता अधिनियम व पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अन्य किसी कानूनी या प्रशासनिक कार्यवाही पर प्रभाव नहीं डालेगा।



