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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

अनुसूचित जाति-जनजाति किसानों को श्री अन्न आधारित कृषि की दी गई जानकारी

  • पूजा परिहार

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के तत्वावधान में संयुक्त संयोजक परमार्थ समाज सेवा संस्थान एवं भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान के सहयोग से आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 30 मार्च 2026 को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य श्री अन्न (मिलेट) आधारित कृषि प्रणाली के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों की क्षमता निर्माण और कौशल विकास करना था।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 50 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रथम चरण में तीन अलग-अलग दिवसीय शिविर बिरगुवा, खुर्रहा बुजुर्ग एवं बैदौरा गांवों में आयोजित किए गए, जबकि दूसरे चरण में तीन दिवसीय कार्यक्रम बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में संपन्न हुआ। इस दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को श्री अन्न की खेती, पोषण तथा व्यावसायिक संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र कार्यवाहक अनिल श्रीवास्तव उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को सनातन धर्म और मोटे अनाज के महत्व के बारे में बताते हुए कृषि से जुड़ी पारंपरिक और वैज्ञानिक जानकारियों से अवगत कराया तथा कृषि उपकरण भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम में डॉ. संतोष पाण्डेय (वाणिज्य विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) एवं डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. नूपुर गौतम ने श्री अन्न से जुड़े व्यावसायिक अवसरों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

इसके अलावा डॉ. ज्योति मिश्रा, डॉ. ममता सिंह एवं डॉ. प्रतिभा आर्या ने श्री अन्न के पोषक तत्वों एवं स्वास्थ्य लाभों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय आईक्यूएसी के डायरेक्टर प्रो. सुनील कश्यप ने की। इस अवसर पर प्रो. सेनी, प्रो. श्रीदेवी, प्रो. अर्चना वर्मा, प्रो. अमरजीत वर्मा और प्रो. श्यामनाथ सहित कई शिक्षाविद उपस्थित रहे।

अंत में डॉ. संतोष पाण्डेय एवं कार्यक्रम संयोजिका डॉ. नूपुर गौतम ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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