नई आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लखनऊ में कार्यशाला आयोजित
- सौरभ शुक्ला
लखनऊ। आपराधिक न्याय प्रणाली को डिजिटल बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अहम कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय स्थित अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद ऑडिटोरियम में ई-समन (e-summons) और ई-एविडेंस (e-evidence) के उपयोग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन टेक्निकल सर्विसेज मुख्यालय के तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि महानिदेशक (कारागार एवं सुधार सेवाएं) पीसी मीणा विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद एडीजी (टेक्निकल सर्विसेज) नवीन अरोड़ा ने कार्यशाला के उद्देश्य और रूपरेखा पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
अपने संबोधन में डीजीपी ने कहा कि ई-समन और ई-एविडेंस जैसे डिजिटल टूल्स आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इन तकनीकों को तेजी से अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में एनआईसी, जेटीआरआई, एनएफएसयू, अभियोजन विभाग, यूपीएसआईएफएस और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के विशेषज्ञों द्वारा छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में डिजिटल प्रक्रियाओं के व्यावहारिक उपयोग, चुनौतियों और सर्वोत्तम तरीकों पर गहन चर्चा की गई।
इस दौरान लगभग 175 नोडल अधिकारी ऑनलाइन जुड़े, जबकि करीब 350 पुलिसकर्मी विभिन्न जिलों, जोन और रेंज से ऑफलाइन उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों की क्षमता वृद्धि, वरिष्ठ अधिकारियों को संवेदनशील बनाना और नए आपराधिक कानूनों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ई-एविडेंस के उपयोग का औसत 46.6 प्रतिशत है, जिसमें भदोही, सोनभद्र और मुरादाबाद अग्रणी हैं। वहीं ई-समन के मामले में 86 प्रतिशत औसत के साथ अमरोहा, कौशांबी और रामपुर शीर्ष स्थान पर हैं।
अधिकारियों ने दोहराया कि उत्तर प्रदेश पुलिस नई आपराधिक व्यवस्थाओं के तहत तकनीकी प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
लखनऊ पुलिस का बड़ा कदम: संगठित अपराध पर लगाम के लिए हेल्पलाइन लॉन्च
नशा और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों पर रोक के लिए जनता से सहयोग की अपील
लखनऊ में संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट ने एक अहम पहल करते हुए “ऑर्गनाइज्ड क्राइम हेल्पलाइन” शुरू की है। इस कदम के जरिए आम नागरिकों को अपराध नियंत्रण की प्रक्रिया में सीधे भागीदार बनाने का प्रयास किया गया है।
24 अप्रैल 2026 से शुरू हुई इस हेल्पलाइन के माध्यम से अब नागरिक नशा तस्करी, मानव तस्करी और अन्य संगठित अपराधों से जुड़ी सूचनाएं सीधे पुलिस तक पहुंचा सकेंगे। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
यह पहल राज्य सरकार की “जीरो टॉलरेंस पॉलिसी” के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य अपराधियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
क्राइम ब्रांच द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 7839861034 पर कोई भी नागरिक गुप्त रूप से जानकारी साझा कर सकता है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी भय के आगे आएं और अपराध के खिलाफ इस मुहिम में सहयोग करें, ताकि शहर को सुरक्षित और अपराधमुक्त बनाया जा सके।


