
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू, समरस समाज के निर्माण पर जोर
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का, धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का?
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर”
- शालिनी शर्मा
लखनऊ। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इन ओजस्वी पंक्तियों के साथ लखनऊ में ‘रश्मिरथी पर्व’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में इस तीन दिवसीय आयोजन की शुरुआत की गई।
यह आयोजन ‘रश्मिरथी’ के हीरक जयंती वर्ष और दिनकर जी की 52वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य समतामूलक, समरस, समावेशी और सांस्कृतिक समाज के निर्माण को बढ़ावा देना है। इस दौरान ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रकवि दिनकर की कृतियों को भारतीय संस्कृति, वीरता और सामाजिक चेतना का सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दिनकर की रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, मंत्री सूर्य प्रताप शाही, मंत्री जयवीर सिंह, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, दिनकर जी के सुपौत्र ऋत्विक उददयन, अपर मुख्य सचिव (संस्कृति) अमृत अभिजात, विशेष सचिव संजय कुमार सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की सहभागिता देखने को मिली। ‘रश्मिरथी पर्व’ के माध्यम से राष्ट्रकवि दिनकर की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।


