काकादेव स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं समता के संदेश को किया गया याद
- ज्योति सिंह
कानपुर नगर। पटेल महिला समिति द्वारा 26 जून 2026 को राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती के अवसर पर काकादेव स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे पर श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म 26 जून 1874 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था। बाल्यावस्था में ही उनकी माता का निधन हो गया था, जिसके बाद कोल्हापुर की महारानी ने उन्हें गोद लिया। वे महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज थे और समाज सुधार तथा सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
वक्ताओं ने बताया कि छत्रपति शाहूजी महाराज को सामाजिक समरसता और समानता का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा, प्रशासन और अन्य सरकारी पदों पर दलितों, पिछड़ों और आदिवासी वर्गों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की थी, जिसके कारण उन्हें आरक्षण का जनक भी कहा जाता है।

उन्होंने छुआछूत, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता का विरोध करते हुए समतामूलक समाज की स्थापना के लिए कार्य किया। प्राथमिक शिक्षा को निशुल्क एवं अनिवार्य बनाना तथा महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना उनके महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल रहा। वे लोकतांत्रिक विचारधारा के समर्थक एवं सामाजिक न्याय के सच्चे जननायक थे।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि वर्ष 1920 में कानपुर के फूलबाग में आयोजित कुर्मी महासभा के अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए उन्हें ‘राजर्षि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
इस अवसर पर पार्षद कमलेश त्रिवेदी (दद्दा), रामकुमारी कटियार, शशी सिंह, नमिता कटियार, अनुराधा सिंह, शुभम वर्मा, रमन कटियार, रेखा कनौजिया, हरीराम कटियार, अशोक वर्मा, संतोष कटियार, सूरज त्रिवेदी, अलंकार वर्मा, आर.के. कटियार, अवधेश कटियार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज के आदर्शों को अपनाने तथा सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।


