पांचवीं स्टेज के मरीजों का ओपीडी में होगा पंजीकरण, परिवार के सदस्य में खोजा जाएगा किडनी डोनर; ट्रांसप्लांट यूनिट में तैयारियां अंतिम चरण में
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। गंभीर किडनी रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। जीएसवीएमएस पीजीआई की किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट में इसी माह पांचवीं स्टेज के किडनी रोगियों के इलाज और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लंबे समय से डायलिसिस करा रहे मरीजों और क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित मरीजों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों का पंजीकरण ओपीडी के माध्यम से शुरू किया जा रहा है। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ प्रशिक्षित ओटी और नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही डायलिसिस यूनिट, ट्रांसप्लांट यूनिट और सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित आवश्यक उपकरण मंगाए जा चुके हैं। उपकरणों के पहुंचने और तैयारियां पूरी होने के बाद ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पांचवीं स्टेज के मरीजों के लिए इसी माह पंजीकरण शुरू करने की तैयारी है।
परिवार से ही तलाशा जाएगा किडनी डोनर
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के परिवार से ही उपयुक्त किडनी डोनर की तलाश की जाएगी। आवश्यक चिकित्सकीय जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर डोनर की उपयुक्तता सुनिश्चित की जाएगी। ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जाएगा।
तीसरी कैथ लैब से गंभीर हृदय रोगियों की जटिल सर्जरी होगी आसान
एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के लिए मरीजों को नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार, पेसमेकर और हृदय के छेद के उपचार की भी सुविधा
कानपुर नगर। कानपुर हृदय रोग संस्थान में तीसरी कैथ लैब शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों के उपचार को और बेहतर सुविधा मिली है। कानपुर के साथ आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों के लिए अत्याधुनिक कैथ लैब की सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तीसरी कैथ लैब की मदद से गंभीर हृदय रोगियों की जटिल प्रक्रियाएं पहले की अपेक्षा अधिक आसानी से की जा सकेंगी। वहीं एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को लंबे इंतजार से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
कैथ लैब में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और स्टेंट डालने के साथ-साथ पेसमेकर प्रत्यारोपण तथा हृदय में मौजूद छेद के उपचार जैसी प्रक्रियाएं भी की जा सकेंगी। इससे गंभीर हृदय रोगियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।


