
सोसाइटी फॉर टूरिज्म डेवलपमेंट एवं ‘मुस्कुराए कानपुर’ की पहल, स्कूलों में टूरिज्म क्लब बनाकर युवाओं को शहर के ऐतिहासिक स्थलों से जोड़ने की योजना
- प्रियंका द्विवेदी
कानपुर नगर। पर्यटन को शहर के खुशहाल विकास का आधार बनाने और कानपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से सोसाइटी फॉर टूरिज्म डेवलपमेंट एवं ‘मुस्कुराए कानपुर’ के बैनर तले कानपुर टूरिज्म क्लब की स्थापना की गई। आवास विकास स्थित होटल कैलास में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक भवानी भीख जी, क्लब के संस्थापक डॉ. सिद्धांशु राय तथा संयोजक पी.सी. अग्निहोत्री की गरिमामयी उपस्थिति में इस पहल की शुरुआत हुई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भवानी भीख जी ने कहा कि कानपुर केवल औद्योगिक नगरी ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के लिहाज से भी पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है। उन्होंने कहा कि जब युवा अपनी मिट्टी के गौरव और शहर की ऐतिहासिक पहचान को समझेंगे, तभी खुशहाल कानपुर के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास हो सकेंगे। पर्यटन के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और स्थानीय विरासत के प्रति गर्व की भावना विकसित करना आवश्यक है।
क्लब के संस्थापक डॉ. सिद्धांशु राय ने कहा कि कानपुर टूरिज्म क्लब का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को शहर की विरासत से जोड़ना है। इसके लिए स्कूलों में टूरिज्म क्लब गठित करने की योजना बनाई जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ अपने शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को जानने का अवसर मिल सके। इससे बच्चों में अपने शहर के प्रति जिज्ञासा, जुड़ाव और गौरव की भावना विकसित होगी।
क्लब के संयोजक पी.सी. अग्निहोत्री ने कहा कि कानपुर टूरिज्म क्लब केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानपुर की आत्मा को पहचानने का अभियान है। इसका उद्देश्य शहर की उन ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक स्थलों को सामने लाना है, जिनसे स्थानीय लोग और युवा अभी पूरी तरह परिचित नहीं हैं।
अमित अग्रवाल और राजेश ग्रोवर ने कहा कि कानपुर की विरासत को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की जरूरत है। बिठूर के ब्रह्मावर्त से लेकर जेके मंदिर, मेस्कर घाट और कानपुर मेमोरियल चर्च तक अनेक ऐसे स्थल हैं, जिनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इन स्थानों से जुड़ी कहानियों को देश-दुनिया के सामने लाकर शहर में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है।

घुमक्कड़ क्लब के संयोजक मुकुल साहू ने कहा कि घुमक्कड़ होने का अर्थ जिज्ञासु होना है। युवाओं में ‘चलो कानपुर को देखो’ की भावना विकसित की जाएगी, ताकि वे अपने आसपास मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक पहचान को करीब से समझ सकें। वहीं, रोमी चावला और विमल झाझरिया ने कहा कि बच्चे किताबों में ताजमहल जैसे प्रसिद्ध स्मारकों के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन अपने ही शहर के भीतरगांव स्थित प्राचीन ईंटों के मंदिर जैसी धरोहरों से अनजान रहते हैं। स्कूल टूरिज्म क्लब इस दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. अमरनाथ और विनोद टंडन ने पर्यटन महोत्सव को शहर में पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी बताया। विवेक मिश्रा और विशाल यादव ने कहा कि जब बच्चे अपनी विरासत पर गर्व करना सीखेंगे, तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव एक जागरूक और आत्मविश्वासी नागरिक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रसून अग्निहोत्री ने पर्यटन को खुशहाल कानपुर का मंत्र बताते हुए कहा कि शहर की पहचान को मजबूत बनाने और लोगों को अपनी विरासत से जोड़ने में पर्यटन अहम भूमिका निभा सकता है। डॉ. आरसी शर्मा और प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि खुशहाली केवल सड़कों और इमारतों से नहीं आती, बल्कि आपसी अपनत्व, सांस्कृतिक जुड़ाव और शहर के प्रति गौरव की भावना से भी आती है। पर्यटन इन भावनाओं को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
दिनेश वार्ष्णेय ने कहा कि कानपुर टूरिज्म क्लब ‘मुस्कुराए कानपुर’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में काम करेगा। क्लब के माध्यम से शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को प्रोत्साहित करने, युवाओं की सहभागिता बढ़ाने और कानपुर की सकारात्मक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में डॉ. कामायनी शर्मा, प्रसून त्रिपाठी, अवलि शुक्ला, अमित गुप्ता, मंजीत ठुकराल, विशाल यादव, अरविंद त्रिपाठी, शिव अवस्थी, सुनील दिवाकर, शैलेंद्र भारती, राजीव सक्सेना और प्रवीण सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कानपुर टूरिज्म क्लब की स्थापना को शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन विकास और युवा सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्कूलों में टूरिज्म क्लब के गठन और स्थानीय ऐतिहासिक स्थलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों से कानपुर की पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।


