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किसान मेले में महिला सशक्तिकरण पर विशेष सत्र, कृषि उद्यमिता और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

सीएसए कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेले में महिला कृषकों को आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और कृषि आधारित स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर हुई चर्चा

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में आयोजित तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करने के साथ उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ना था। कार्यक्रम में महिला कृषकों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्रामीण विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक रहे, जबकि अध्यक्षता चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में कल्याणपुर की विधायक श्रीमती नीलिमा कटियार, सरसौल की ब्लॉक प्रमुख डॉ. विजय रत्ना तोमर, गृह विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर तथा कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार उपस्थित रहे। किसान मेले के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे निदेशक प्रसार एवं उद्यान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी भी मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने संबोधन में बताया कि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के बीच शीघ्र ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके माध्यम से दोनों विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हुए अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और नवीन तकनीकों के हस्तांतरण की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार और समाज के विकास में भी उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में महिला कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र के दौरान कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका, कृषि आधारित आजीविका, आधुनिक तकनीकों को अपनाने, मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, पोषण वाटिका, उद्यमिता विकास और कृषि उत्पादों के विपणन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें कृषि क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार की अंत्योदय योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से महिलाओं तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, कौशल विकास का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, वित्तीय सहायता से जोड़ने और उनके उत्पादों के लिए उपयुक्त बाजार उपलब्ध कराने से उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।

डॉ. संजीव गुप्ता ने विश्वविद्यालय की ओर से महिला कृषकों को आवश्यक वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

निदेशक प्रसार एवं उद्यान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि किसान मेले में कानपुर के विभिन्न विद्यालयों के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि मेले में इस दिन साढ़े आठ हजार से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो किसानों, विद्यार्थियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की रुचि को दर्शाता है।

इस अवसर पर सरसौल की ब्लॉक प्रमुख डॉ. विजय रत्ना तोमर ने महिला सशक्तिकरण को कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को वैज्ञानिक तकनीकों, प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों और बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है। इससे कृषि को अधिक टिकाऊ, समावेशी और लाभकारी बनाने में भी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के माध्यम से महिला कृषकों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नए अवसरों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया। आयोजन में आधुनिक कृषि तकनीकों, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग के जरिए महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति मजबूत बनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

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