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मुहूर्तशास्त्र और हिन्दू पंचांग के अनुसार महाष्टमी पर्व एवं नवमी पूजन कब करना चाहिए? जानिए शुभ मुहूर्त —

18 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि आ रही है, जोकि सुबह 08:27 मिनट तक व्याप्त है। हिंदू पंचांग और उदयातिथि के नियमानुसार उस दिन पूरे समय सप्तमी तिथि ही मानी जाएगी।

• मुहूर्त शास्त्र, हिंदू पंचांग के नियम: हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले विभिन्न व्रत, पूजन, पर्व, त्योहार आदि के लिए दिन और रात्रि के अनुसार भिन्न भिन्न नियम लागू होते हैं।

• 18 अक्टूबर 2026 की स्थिति: इस दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि व्याप्त है, इसलिए पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि ही मानी जाएगी।

• अष्टमी तिथि का मान: चूँकि अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 08:27 बजे के बाद लग रही है और सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि है, इसलिए व्रत-त्योहार (जैसे दुर्गा अष्टमी) के संदर्भ में 19 अक्टूबर 2026 पर अष्टमी पूरे दिन मानी जाएगी।

•नवमी तिथि का मान: 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 मिनट से नवमी तिथि आएगी लेकिन इस दिन नवमी तिथि का कोई प्रभाव मान्य नहीं होगा। अतः 20 अक्टूबर को सुबह 06: 30 मिनट से सूर्योदय के समय नवमी तिथि, दोपहर 12:50 मिनट तक रहेगी। इसी आधार पर नवमी तिथि पूरे दिन 20 अक्टूबर 2026 को व्याप्त है और इस दिन कन्या पूजन विधि करें।

•दशमी तिथि का प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से है एवं दशमी तिथि का समापन 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट पर हो रहा है।

•20 अक्टूबर को ही दशहरा क्यों मनाया जा रहा है? कारण जानिए– जैसा कि लेख की शुरुआत में ही दिन और रात्रि में होने वाले पर्व एवं त्योहारों के नियम व समय भिन्न भिन्न बताए गए हैं, उसी क्रम में रावण दहन करने के समय पर सूर्यास्त, दशमी तिथि और प्रदोष काल इन तीनों का संयुक्त रूप से व्याप्त होना अनिवार्य होता है, तभी रावण दहन पूर्ण रूप से सही माना जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, दशहरे पर रावण दहन हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में किया जाता है। 20 अक्टूबर की रात को प्रदोष काल में दशमी तिथि पूरी तरह उपलब्ध रहेगी, जबकि 21 अक्टूबर को सूर्यास्त से बहुत पहले ही (दोपहर 02:11 बजे) दशमी तिथि समाप्त हो जाएगी।

•श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त: विजयादशमी के लिए दशमी तिथि के साथ, श्रवण नक्षत्र, (जो प्रातः काल से ही श्रवण नक्षत्र संध्याकाल में 06:02 मिनट तक व्याप्त है) प्रदोष काल और विजय मुहूर्त का संयोग देखा जाता है। यह तीनों ही शुभ योग 20 अक्टूबर को दोपहर के बाद प्राप्त हो रहे हैं, जो 21 अक्टूबर को नहीं मिल रहे हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों (जैसे निर्णयसिंधु) के अनुसार, यदि दशमी तिथि दो दिन के अपराह्न काल (दोपहर के समय) में व्याप्त हो, तो पहले दिन वाली तिथि को ही प्राथमिकता दी जाती है।

•दशहरा पूजन के लिए दोपहर का मुहूर्त: 01:14 मिनट से 03:30 बजे तक है एवं विजया मुहूर्त 01:59 से 02:45 मिनट तक है एवं रावण दहन (स्थानीय समय भिन्न हो सकता है) का मुहूर्त सूर्यास्त 05:47 मिनट के बाद से है।

•इस आधार पर यदि समझा जाए तो अष्टमी नवमी एक दिन व्याप्त ना होकर नवमी दशमी तिथि एक दिन पर व्याप्त हो रही हैं और विजयादशमी का त्यौहार 20 अक्टूबर, मंगलवार के दिन मनाया जाना शास्त्रसम्मत उचित है।

(विशेष: राज्य/शहर के स्थानीय पंचांग अनुसार, मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, कृपया जांच कर लें।)

  • ज्योतिर्विद अशनिका शर्मा

मो: 9568962423

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