HomeAstrologyज्योतिष और अंकशास्त्र का बढ़ रहा है महत्व- (भाग 9)

ज्योतिष और अंकशास्त्र का बढ़ रहा है महत्व- (भाग 9)

अंकशास्त्र के जनक यूनान के प्रसिद्ध अंकशास्त्री पाइथागोरस थे। इनके ही कारण अंक ज्योतिष भारत सहित एशिया के कई देशों में काफी तेजी से विकसित हो गया। लेकिन भारतीयों ने जो तत्कालीन समय में वैदिक ज्योतिष के अच्छे खासे जानकार रहे, उन्होने यूनानी अंकशास्त्र की मूल पद्धति में वैदिक ज्योतिष पर आधारित अपने शोध, अनुभव को भी शामिल करके विभिन्न प्रकार की गणना, परिभाषा अंकशास्त्र में शामिल कर दी और इससे एक नये भारतीय अंकशास्त्र का उद्भव हुआ जिससे अंकशास्त्र के माध्यम से विश्लेषण करना कहीं अधिक सरल और प्रभावपूर्ण होता चला गया। वर्तमान में, अनुभव के आधार पर अंकशास्त्र विद्या में कई तरह के शोध हो रहे हैं। नवीन शोधों के साथ अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध हैं। क्यूंकि अब इसमें वैदिक ज्योतिष शास्त्र का भी मिश्रण करते हुये अध्ययन किया जाने लगा है। जो मूल यूनानी अंकशास्त्र से कहीं अधिक सटीक व सार्थक साबित होता है। वर्तमान में वैदिक ज्योतिष, अंकशास्त्र को मानने वाले लोगों की संख्या में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती जा रही है। अब दोनों ही प्रकार की पारम्परिक व प्राचीन विधाओं से लोग विश्लेषण करवाना और अपने जीवन को मार्गदर्शित करना आवश्यक समझते हैं। लेकिन सटीक और सार्थक विश्लेषण भी तभी संभव है जब दोनों ही विद्याओं के जानकार के पास अच्छा मार्गदर्शन करने के साथ इन शास्त्रों में निजी अनुभव, शोधकार्य भी बहुत मजबूती से किया गया हो। क्यूंकि किसी शोध के बिना दोनों ही विधायें अधूरी हैं, अपर्याप्त हैं। फलित (prediction) किस प्रकार से किया जाये, क्या लिखकर दिया जाये, उसका तरीका किसी भी ज्योतिष, अंकशास्त्र की पुस्तक में नहीं लिखा होता है। फलित को जितना बेहतर कोई व्यक्ति अपने शोध से बना सकता है और उसे अपने अनुभव से बाहर निकाल सकता है, वह केवल इन विधाओं में की गई वर्षों की मेहनत के द्वारा ही सम्भव है। अन्यथा उसका कोई तरीका किसी भी महँगी से महँगी पुस्तक में शामिल नहीं होता है।

अंकशास्त्र की उपयोगिता— देखा जाये तो अंकशास्त्र का प्रयोग जीवन में अधिकांश लोग करते हैं। मकान, मोबाइल के लकी नम्बर से लेकर वाहन, नामाक्षर चयन आदि में कर रहे हैं। कई लोग मेरे पास ऐसे भी आये हैं जिन्होने अंकशास्त्र के आधार पर अपने नाम, व्यवसायिक उपक्रम में नाम परिवर्तन करने का परामर्श लिया है और इस प्रकार के कार्य के लिए ज्योतिष और अंकशास्त्र दोनों ही पद्धतियों के माध्यम से इस विश्लेषण को सम्पूर्ण करने का मेरा अनुभव, शोध अभीतक सफल ही रहा है। अंकशास्त्र में 1 से 9 तक संख्या दी गयी हैं। जिनके आधार पर ही अंकशास्त्र आरम्भ होता है। इन अंकों पर भिन्न-भिन्न ग्रहों का स्वामित्व (lordship of planet) होता है। जैसे– 1 सूर्य, 2 चन्द्रमा, 3 बृहस्पति, 4 राहु, 5 बुध, 6 शुक्र, 7 केतु, 8 शनि एवं 9 मंगल इन ग्रहों के प्रभाव को देखते हुये ही विश्लेषण करने का प्रयास किया जाता है। इसके आधार पर ही आज अंक 9 के विषय में फलित किया जा रहा है। पिछ्ले भाग में हम अंक 1 से 8 तक विश्लेषण कर चुके हैं। यह लेख जिनका जन्म 9, 18, 27 तारीख में हुआ है वह लोग पढ़ें। इन तारीखों में जन्मे व्यक्तियों का जन्मांक 9 होता है। जैसे- अंक 18 को आपस में जोड़े तो कुल 9 अंक बनेगा। जिनका जन्म 9,18,27 तारीख में हुआ है वह लोग मंगल ग्रह के प्रभाव के अधीन हैं। मंगल ग्रह इस जन्मांक के लोगों को ऐसे कार्य में जाने के लिए प्रेरित करते हैं जहाँ वह अपना अदम्य साहस, अनंत ऊर्जा, दृढ़ संकल्प, जोखिम भरे काम में प्रदर्शन कर सकें और यह सभी गुण जन्मांक 9 वाले व्यक्ति में अधिक पाये जाते हैं। यह लोग अधिकतर मार्शल आर्ट, जिम, खेल कूद, नेवी, शारिरीक श्रम वाले कार्य, इन्जीनियर, कंस्ट्रक्शन, सेना, पर्वतारोहण जैसे कामों में दिलचस्पी लेते हैं। इनका शारिरीक व्यक्तित्व काफी हद तक सुडौल, फुर्तीला, चर्बी मुक्त रहता है। 

जन्मांक 18 में जन्में व्यक्ति सूर्य, शनि व मंगल ग्रह के प्रभाव में आते हैं। यहां सूर्य, मंगल का शनि के साथ परस्पर विरोध बना रहता है, इसलिए इस जन्मांक में जन्मे व्यक्ति को जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना जरूरत से ज्यादा करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन हो या व्यवसायिक इनके सम्बन्ध स्थिर नहीं रहते व समय के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए अधिकतर देखा जाता है कि इनके वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल लगातार बनी रहती है क्युंकि इस अंक में शनि का नकारात्माक प्रभाव सूर्य व मंगल की ऊर्जा से मेल नहीं खाता है जिस कारण से इन लोगों में अहम की अधिकता हो सकती है और यह हर किसी के साथ मानसिक टकराव पैदा कर लेते हैं। तमाम तरह के टकराव व विरोध झेलने के बावजूद भी यह अपने व्यवसायिक जीवन की नैय्या पार कर लेते हैं किन्तु निजी जीवन किसी ना किसी रुप में प्रभावित होता रहता है। इस अंक में जन्मे व्यक्ति को किसी के अधीन कार्य करने की आदत नहीं होती है। इनकी इच्छा हमेशा खुद का कुछ काम करने की होती है या फिर ऐसे माहौल में कार्य कर पाते हैं जहां इन पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध ना हो और इन्हीं का दबदबा कायम रहे। कानूनी कार्य, सरकार से जुड़े विभाग में कोई ठेका लेना या नौकरी, अध्यापन, तकनीकी ज्ञान और फ्री होल्ड वर्किंग, एनजीओ, शासन प्रशासन के लोगों के साथ मिलकर किसी सरकारी योजना पर काम करना, सामाजिक कार्यकर्ता के रुप में काम करने की इच्छा होती है। जन्मांक 27 में जन्मे व्यक्ति पर चंद्रमा, केतु, मंगल का प्रभाव होता है। यह अंकशास्त्र की सभी अंकों की श्रंखला में सबसे अधिक शक्तिशाली अंक में स्थान पाता है। इस अंक में जन्मे व्यक्ति का शुरुआती जीवन मिला जुला रहता है। यानी जब इस व्यक्ति का जन्म होता है तो इसे स्वतन्त्रा के साथ कोई ना कोई जिम्मेदारी जरूर निभानी पड़ सकती है चाहे वह घर की हो, काम की हो या आर्थिक रूप से जुड़ी हो। यह अपनी आज़ादी के साथ साथ दायित्वों की भी पूर्ति करते हुये चलते हैं। इस अंक में जन्मे लोगों के दृढ़ संकल्प को तोड़ना असम्भव है। अकसर इनके आसपास मौजूद लोग इनके दृढ़ स्वभाव की तुलना जिद से कर बैठते हैं। कैसी भी परिस्थिति इनके सामने हो ये अडिग रहकर मुकाबला कर लेते हैं। निडर होने के साथ ये संवेदनशील भी बहुत होते हैं। युवावस्था में ही गंभीरता आ जाती है, आयु के मध्य भाग में आध्यात्मिक झुकाव बढ़ने लगता है। ये कोई भी काम कर सकते हैं। इन्हें ऑल राउंडर कहा जाये तो ज़्यादा सही होगा। माता से मीठी नोंक-झोंक होती रहती है एवं माता को कई स्वास्थ्य समस्याएँ भी घेर लेती हैं। इस जन्मांक में चन्द्रमा केतु के कारण दबाव महसूस करता है इसलिए इन लोगों में गहरी समझ बूझ, अति संवेदनशीलता देखी जा सकती है। मंगल का प्रभाव शुभ होना (कुंडली में) इस जन्मांक के लोगों के लिए संजीवनी का काम करता है। इनके करियर की शुरुआत धीमी व कई बदलाव के साथ होती है। अलग-अलग तरह के काम भी करने पड़ सकते हैं जिनमें कोई विधिवत शिक्षा भी ना ली हो। जैसे-जैसे इनकी आयु 30 वर्ष को पार करती है इनकी अपने क्षेत्र में पहचान बनने लगती है और मध्य आयु तक यह निजी कार्य व्यवसाय को प्राथमिकता देते हैं। नौकरी से शुरुआत करते हुये इनकी जीवन यात्रा अपने ही काम पर आकर रुकती है। कभी- कभी इस अंक के लोग अपने वैवाहिक जीवन में आनंद की कमी महसूस कर सकते हैं। मंगल का अंक होने के कारण इनकी वाणी में स्पष्टता, आवेगपूर्ण रवैया आ जाता है जो सामने वाले की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकता है। लेकिन इनकी बिना किसी भेदभाव के कही गई सीधी बात भी हर किसी को समझ नहीं आती हैं।

[अंकशास्त्र की सभी 1 से 9 अंक की श्रंखला प्रकाशित की जा चुकी हैं, आशा करते हैं कि आप सभी पाठकों ने अंकशास्त्र की इस महत्वपूर्ण जानकारी से लाभ प्राप्त किया है। ]

ज्योतिर्विद् अशनिका शर्मा

मो- 9568962423

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