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सीएसए में दीक्षारंभ कार्यक्रम का दूसरा दिन: विद्यार्थियों को जैविक खेती के महत्व की दी गई जानकारी

236 नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, कृषि शिक्षा, अनुसंधान, रोजगार और सतत कृषि विकास की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर के कृषि एवं वानिकी महाविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न शैक्षणिक एवं जागरूकता संबंधी व्याख्यान हुए। 24 अक्टूबर से 6 नवंबर, 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, रोजगार की संभावनाओं और जैविक खेती के महत्व से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता के मार्गदर्शन एवं कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार के नेतृत्व में किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और करियर के अवसरों पर चर्चा

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के अध्यक्ष तथा निदेशक, प्लेसमेंट डॉ. विजय यादव ने विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक उपलब्धियों और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाकर विद्यार्थी अपने ज्ञान और व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर नियमित अध्ययन करने, अनुशासन बनाए रखने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी क्षमताओं को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. यादव ने कृषि एवं वानिकी के क्षेत्र में उपलब्ध करियर और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक जीवन के शुरुआती दौर से ही भविष्य की तैयारी करने की सलाह दी।

जैविक खेती से मृदा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

द्वितीय सत्र में सहायक प्राध्यापक (संविदा) डॉ. अनन्या गैरोला ने वर्तमान समय में जैविक खेती की प्रासंगिकता और महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जैविक खेती के मूल सिद्धांतों तथा मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका को विस्तार से समझाया।

उन्होंने बताया कि जैविक खेती की उचित तकनीकों को अपनाकर रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत कृषि विकास के लिए जैविक खेती की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. गैरोला ने विद्यार्थियों को कृषि की आधुनिक चुनौतियों को समझने और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।

236 विद्यार्थियों ने किया प्रतिभाग

दीक्षारंभ कार्यक्रम में कृषि एवं वानिकी के लगभग 236 नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार, डॉ. उमानाथ शुक्ला, डॉ. रजत मिश्रा एवं डॉ. भारतेन्दु यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं और उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराने के साथ उन्हें आधुनिक कृषि एवं वानिकी की चुनौतियों, रोजगार की संभावनाओं और सतत विकास के प्रति जागरूक करना है। ऐसे शैक्षणिक सत्र विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं।

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