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अत्याचारियों का अंत शांति के लिए आवश्यक: श्रीकृष्ण मठ में बोले PM मोदी

  • नेहा पाठक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को श्री कृष्ण मठ में आयोजित लक्ष कंठ गीता परायण कार्यक्रम में ‘गीता पुरुषोत्तम अध्याय’ के पाठ के बाद संबोधन देते हुए कहा कि भगवद् गीता का संदेश बताता है कि “शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक है।”

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा नीति इसी विचार पर आधारित है। उन्होंने कहा, “हम वसुधैव कुटुंबकम की भावना भी रखते हैं और धर्मो रक्षति रक्षितः के मंत्र पर भी चलते हैं।”

उन्होंने बताया कि लाल किले से करुणा का संदेश देने के साथ-साथ ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा भी इसी भावना का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य देश के औद्योगिक और सार्वजनिक क्षेत्रों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना है।

“नया भारत न झुकता है, न पीछे हटता है”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में देश ने सरकार का दृढ़ संकल्प देखा है। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वालों को याद किया और कहा कि पहले की सरकारें ऐसे हमलों पर निष्क्रिय रहती थीं, लेकिन “नया भारत” अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है।

गीता की शिक्षाएँ आज भी राष्ट्र-निर्माण की दिशा तय करती हैं

मोदी ने कहा कि श्री कृष्ण की शिक्षाएँ केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की नीति को भी दिशा देती हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकारी नीतियों—सबका साथ, सबका विकास से लेकर आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना—पर भी गीता के सिद्धांतों का प्रभाव है।

महिलाओं के 33% आरक्षण वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नारी सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण गीता की ही प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री ने दिलाए नौ संकल्प

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को नौ संकल्प दिलाए, जिनमें शामिल हैं—

  1. जल संरक्षण
  2. माँ के नाम एक पेड़ लगाना
  3. कम से कम एक गरीब का जीवन सुधारने का प्रयास
  4. स्वदेशी को बढ़ावा देना (वोकल फॉर लोकल)
  5. प्राकृतिक खेती
  6. मिलेट और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना
  7. योग को जीवन का हिस्सा बनाना
  8. पांडुलिपियों के संरक्षण में सहयोग
  9. विरासत से जुड़े 25 स्थलों का दर्शन

उडुपी और गुजरात के ऐतिहासिक संबंध का उल्लेख

उन्होंने कहा कि उडुपी का राम मंदिर आंदोलन में योगदान देश जानता है और यहां माधवाचार्य के नाम पर बनाए गए विशाल द्वार से यह संबंध और मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में स्थापित कृष्ण विग्रह पहले गुजरात में माता रुक्मणी द्वारा पूजित थे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मठ में बने सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में महंत सुगणेन्द्र तीर्थ स्वामी ने प्रधानमंत्री को ‘रक्षा कवच’ पहनाकर सम्मानित किया।

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