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अधिवक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार के विरोध में सौंपा गया ज्ञापन, अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की उठी मांग

  • विवेक कुमार

कानपुर देहात। प्रदेश में अधिवक्ताओं के साथ लगातार हो रही अभद्रता और पुलिस की बर्बरता के मामलों को लेकर अधिवक्ताओं में गहरा रोष व्याप्त है। इसी क्रम में आज कानपुर देहात के अधिवक्ताओं ने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उत्तर प्रदेश सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। अधिवक्ताओं ने कहा कि बार-बार अधिवक्ताओं को निशाना बनाया जाना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ न्याय व्यवस्था पर सीधा आघात है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ज्ञापन में हाल ही में बनारस बार एसोसिएशन के सम्मानित सदस्य के साथ घटी घटना का कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा गया कि इस तरह की घटनाएं अधिवक्ता समाज का मनोबल तोड़ने वाली हैं। साथ ही मिर्जापुर में अधिवक्ता पर हुई मारपीट की घटना की भी घोर निंदा की गई।

इस दौरान अधिवक्ता समुदाय ने कहा कि बार-बार घटनाओं के बावजूद सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू होने से न केवल अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में आम जनता का विश्वास और भी मजबूत होगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से एडवोकेट ज्योति सिंह राणा (प्रत्याशी सदस्य, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश), वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर चतुर्वेदी, शिव प्रताप सिंह भदौरिया, नरेश कुमार मिश्रा, राज किशोर दोहरे, आशुतोष द्विवेदी, साकेत ओमर, मनोज यादव, शिवम् तिवारी, आलोक सिंह, सतनाम, जितेंद्र कुमार, मोनू यादव, अजय दिवाकर और प्रदीप कुमार शर्मा सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।

अधिवक्ताओं ने अंत में कहा कि न्याय व्यवस्था के प्रहरी होने के नाते उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि उनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

जय हिंद, जय अधिवक्ता समाज।

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