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अभिजीत दीपके के माता-पिता ने जताई राहत, बोले- अब बेटा सुरक्षित घर लौट आए

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परिवार ने ली राहत की सांस, महीनों की चिंता के बीच बेटे की घर वापसी की जताई इच्छा

  • नेहा पाठक

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चलाए गए अभियान के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनके परिवार ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित माता-पिता ने अब उसके जल्द घर लौटने की इच्छा जताई है।

अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने भावुक होकर कहा कि वह अब अपने बेटे को जल्द घर बुलाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह स्वयं नहीं आया तो परिवार उसे लेने जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बार वह बेटे का स्वागत आरती उतारकर करेंगी। अनीता ने याद किया कि पिछली बार अभिजीत ने खुद को सामान्य व्यक्ति बताते हुए आरती उतारने से मना कर दिया था।

उन्होंने कहा कि बेटे की ईमानदारी और हजारों युवाओं के समर्थन ने इस अभियान को सफल बनाया। आंदोलन शुरू होने के बाद से वह लगातार चिंता में रहती थीं और कई रातें बिना सोए गुजारनी पड़ीं। हर सुबह उन्हें इस बात का डर सताता था कि कहीं कोई अप्रिय खबर या वीडियो सामने न आ जाए। ऐसे में वह लगातार अभिजीत के साथियों से उसकी सुरक्षा की जानकारी लेती रहती थीं।

अनीता ने कहा कि आंदोलन के पहले दिन वह चिंता और पीड़ा के कारण रो पड़ी थीं, लेकिन आज उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को युवाओं की जीत बताया।

वहीं, अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने कहा कि परिवार की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है, इसलिए बेटे के राजनीति में आने के बाद से सभी लोग लगातार चिंता में थे। उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी और सुरक्षा की आशंका को देखते हुए उन्होंने जून में अभिजीत से अमेरिका से भारत नहीं लौटने का आग्रह भी किया था।

भगवानराव ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान परिवार पर मानसिक दबाव बना रहा और उन्हें धमकियों का भी सामना करना पड़ा। हालात ऐसे हो गए थे कि शुरुआती दिनों में परिवार को अपना घर छोड़कर कोंकण में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि लगातार तनाव का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा और परिवार ठीक से भोजन और आराम तक नहीं कर पा रहा था।

उन्होंने आंदोलन के दौरान अभिजीत पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय उन्हें बेटे की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका हो गई थी। हालांकि अब वह सुरक्षित है और परिवार चाहता है कि वह घर लौटकर कुछ समय उनके साथ बिताए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए भगवानराव दीपके ने कहा कि इसे किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इतने बड़े पद से इस्तीफा देना बड़े दिल की बात है और छात्रों के हितों का उल्लेख करना सकारात्मक संदेश है।

उन्होंने कहा कि अभिजीत आगे राजनीति में क्या कदम उठाएंगे, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। हालांकि एक पिता के रूप में वह हर परिस्थिति में अपने बेटे के साथ खड़े रहेंगे।

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