कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम: कानपुर की विरासत, उद्योग और संस्कृति से रूबरू हुए प्रतिभागी

- दीपक कुमार
कानपुर नगर। कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत शहर पहुंचे प्रतिभागी युवाओं ने कानपुर के ऐतिहासिक, धार्मिक, औद्योगिक और शैक्षिक महत्व के स्थलों का भ्रमण किया। दिनभर चले इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को शहर की विरासत, उद्योग और सामाजिक संरचना से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत कानपुर प्राणि उद्यान से हुई, जहां युवाओं ने विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों को करीब से देखा और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को समझा। इस अवसर पर जूलॉजिकल पार्क के निदेशक कन्हैया लाल और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर नवेद इकराम ने वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित जानकारी साझा की।
इसके बाद प्रतिभागियों ने जाजमऊ स्थित ऐतिहासिक हजरत मखदूम शाह अलाउल हक उर्फ दादा मियां दरगाह का भ्रमण किया। यहां उन्हें गंगा-जमुनी तहजीब, सूफी परंपरा और धार्मिक समरसता की विरासत से अवगत कराया गया। युवाओं ने इसे सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम के तहत एक प्रिंटिंग प्रेस का भी शैक्षिक भ्रमण कराया गया, जहां प्रतिभागियों ने समाचार पत्र के संकलन, संपादन, डिजाइनिंग और प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा। साथ ही आधुनिक प्रिंटिंग तकनीक, मीडिया की भूमिका और लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्व पर भी जानकारी दी गई।
अंतिम चरण में युवाओं को कानपुर के प्रसिद्ध चमड़ा उद्योग से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने लेदर इंडस्ट्री की निर्यात क्षमता, रोजगार सृजन और ‘मेक इन इंडिया’ में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया और वैश्विक बाजार में कानपुर की स्थिति की जानकारी भी दी गई।
भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने शहर के प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड का स्वाद भी लिया, जिससे उन्हें कानपुर की सांस्कृतिक विविधता और खान-पान की विशेषताओं को करीब से जानने का अवसर मिला।
जिला युवा अधिकारी अनुपम कैथवास के अनुसार, कार्यक्रम के आगामी चरणों में संवाद सत्र, सांस्कृतिक संध्या और समापन समारोह आयोजित किए जाएंगे।



