एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर की पहल, 40 से अधिक शिशु रोग विशेषज्ञों ने लिया भाग
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, कानपुर द्वारा सेंट्रल आईएपी (Indian Academy of Pediatrics) कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें कानपुर एवं आसपास के जनपदों से लगभग 40 शिशु रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में किशोर मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार संबंधी समस्याओं और एचपीवी (HPV) टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्य, डॉ. शालिनी भसीन एवं डॉ. अमितेश यादव ने किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक चुनौतियों और व्यवहार संबंधी समस्याओं पर व्याख्यान दिए। वहीं डॉ. राज तिलक ने एचपीवी वैक्सीन की उपयोगिता बताते हुए कहा कि समय पर टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर सहित एचपीवी संक्रमण से होने वाली कई गंभीर बीमारियों की प्रभावी रोकथाम संभव है।
विशेषज्ञों ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक सात किशोरों में से एक किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित है। यह इस आयु वर्ग में कुल रोग भार का लगभग 15 प्रतिशत है। लगभग 50 प्रतिशत मानसिक रोगों की शुरुआत 14 वर्ष की आयु से पहले तथा 75 प्रतिशत समस्याएं 24 वर्ष की आयु तक शुरू हो जाती हैं। समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर इसका प्रभाव शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक संबंधों और भविष्य के जीवन पर पड़ सकता है।
कार्यशाला में बताया गया कि बढ़ता स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक तनाव, साथियों का दबाव, साइबर बुलिंग तथा नशे की बढ़ती प्रवृत्ति किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने, उन्हें पर्याप्त समय देने, स्क्रीन टाइम सीमित करने, खेलकूद एवं शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक या शिशु रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने की अपील की।
एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, कानपुर के अध्यक्ष डॉ. जे. के. गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ और मानसिक रूप से सशक्त किशोर ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। उन्होंने कहा कि किशोरों की मानसिक समस्याओं को सामाजिक कलंक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी विषय मानते हुए समय पर पहचान और उपचार को प्राथमिकता देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यशाला का समापन विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र और सार्थक चर्चा के साथ हुआ।


