डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने पिता को सौंपी ई-रिक्शा की चाबी, इलाज और शिक्षा के बाद आजीविका भी हुई सुनिश्चित
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। सुनने और बोलने में असमर्थ दिव्यांग बेटी खुशी गुप्ता और उसके परिवार के जीवन में प्रशासन की पहल से एक और नई उम्मीद जुड़ गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपकर परिवार की आजीविका को स्थायी सहारा प्रदान किया। यह ई-रिक्शा एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है।
ई-रिक्शा का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर किया गया है। कल्लू गुप्ता अब तक किराये का ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन हाल ही में सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण उनकी आय प्रभावित हो गई थी। जिलाधिकारी की पहल से अब परिवार को स्थायी रोजगार का साधन मिल गया है।
खुशी गुप्ता की संघर्षगाथा उस समय चर्चा में आई थी, जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली थीं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने उसके इलाज, शिक्षा और पुनर्वास के लिए व्यापक सहायता उपलब्ध कराई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। अब वह पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है तथा नियमित स्पीच थेरेपी के बाद उसने बोलना भी शुरू कर दिया है। उसकी शिक्षा के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने लखनऊ के समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में प्रवेश भी सुनिश्चित कराया है।
ई-रिक्शा मिलने के बाद खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “थैंक यू योगी जी।” उसकी मां गीता गुप्ता ने कहा कि पहले बेटी के इलाज और पढ़ाई की चिंता थी, अब रोजी-रोटी की चिंता भी समाप्त हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार जताया।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में किसी प्रकार की कमी न रहे। उसी के अनुरूप उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।


