राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में राजभवन में हुआ ऐतिहासिक एमओयू हस्ताक्षर


यूपी के 9 विश्वविद्यालयों और वियतनाम की यूनिवर्सिटीज़ के बीच सहयोग समझौता
- अनुराधा सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को राजभवन में एक ऐतिहासिक शिक्षा सहयोग कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 9 विश्वविद्यालयों और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस (UEF) तथा ह्यूटेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के बीच विविध विषयों पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम में वियतनाम की दोनों प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ की विशेषताओं पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गई। इस एमओयू के अंतर्गत अध्यापकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए विनिमय कार्यक्रम (एक्सचेंज प्रोग्राम), संयुक्त शोध गतिविधियाँ, डुअल एवं जॉइंट डिग्री प्रोग्राम, पाठ्यक्रम विकास, सेमिनार, अकादमिक बैठकों में सहभागिता और शॉर्ट टर्म अकादमिक कार्यक्रमों में सहयोग जैसे कई बिंदुओं पर सहमति बनी।
कार्यक्रम में आईआईटी कानपुर, लखनऊ विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (कानपुर), दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गोरखपुर), डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (लखनऊ), महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (वाराणसी), प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय (प्रयागराज) और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (मेरठ) के कुलपतिगण उपस्थित रहे।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस पहल को भारत-वियतनाम मैत्री संबंधों को सुदृढ़ करने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता न केवल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाएगा, बल्कि शोध और नवाचार के नए द्वार भी खोलेगा।


राज्यपाल ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय आज अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 17 विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) द्वारा A++, A+ एवं A की रैंकिंग प्राप्त हुई है, जबकि QS एशिया रैंकिंग में 6 विश्वविद्यालयों को स्थान मिला है और यूजीसी ने 5 विश्वविद्यालयों को श्रेणी-1 का दर्जा प्रदान किया है।
राज्यपाल ने कहा कि यह सब शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ यह सहभागिता छात्रों को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करेगी और उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित करेगी।
उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम की सभ्यताएँ प्राचीन काल से ज्ञान, परिश्रम और शांति की धारा से जुड़ी रही हैं। शिक्षा का यह पुल दोनों देशों को न केवल ज्ञान में बल्कि मानवीय संवेदनाओं में भी और अधिक समीप लाएगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नालंदा और तक्षशिला जैसी प्राचीन शिक्षा परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता उसी ज्ञान परंपरा का आधुनिक रूप है, जो विश्व बंधुत्व का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा मिलेगी और भारत पुनः विश्वगुरु के अपने गौरवशाली स्थान की ओर अग्रसर होगा।
राज्यपाल ने अंत में वियतनाम से आए प्रतिनिधियों और प्रदेश के कुलपतिगणों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह एमओयू ज्ञान-विकास का एक उज्ज्वल अध्याय सिद्ध होगा।



