छात्रों के हक़ की जब भी बात,
मैं हर कदम उनके साथ।
नीट परीक्षा में जो अन्याय हुआ,
उस पर उठी मेरी हर आवाज़।
मेहनत का जब मोल न मिले,
मन में पीड़ा, आँखों में ज्वाला।
शिक्षा जैसे पावन मंदिर पर,
क्यों भ्रष्टाचार ने डाला ताला?
पर छात्रों की इस पावन लड़ाई में,
कुछ लोग राजनीति चमकाते हैं।
हक़ की आवाज़ के इस मंच से,
धर्म पर कीचड़ उछाल जाते हैं।
शिक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर,
फिर नफ़रत का शोर क्यों है?
आरएसएस हो या सनातन,
इन पर प्रहार का ज़ोर क्यों है?
ब्राह्मण कुल में जन्म मिला,
हिंदू होना मेरा अभिमान।
सनातन मेरी आत्मा में बसता,
यही मेरी पहचान, यही सम्मान।
मैं किसी दल की नहीं समर्थक,
न स्वार्थों की कोई प्यास।
पर धर्म का जब अपमान दिखे,
उठती है भीतर से आवाज़।
“धर्मो रक्षति रक्षितः”
रग-रग में जिसका संदेश।
छात्रों की लड़ाई लड़नी है,
नफ़रत का नहीं परिवेश।
मुर्दाबाद के नारों से तुम,
अपना एजेंडा मत चलाओ।
शिक्षा के सच्चे प्रश्नों को,
राजनीति में मत उलझाओ।
शिक्षा की बात होगी जहाँ,
मैं हर पल साथ निभाऊँगी।
पर धर्म-संस्कृति पर चोट हुई,
तो चुप कभी न रह पाऊँगी।
छात्रों को ढाल न बनने दो,
सच की राह अपनाओ।
अपने गंदे स्वार्थों से ऊपर उठो,
शिक्षा का मान बचाओ।
— योगिता तिवारी



