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कैसे लिखूँ मैं अपनी मोहब्बत की दास्ताँ, लफ़्ज़ थोड़े हैं और एहसास बेहिसाब हैं …….

अंदाज़-ए-वफ़ा

कैसे लिखूँ मैं अपनी मोहब्बत की दास्ताँ,
लफ़्ज़ थोड़े हैं और एहसास बेहिसाब हैं।
चाहा तो बस तुझे दिल की दुनिया बनाना था,
बाकी जो कुछ भी मिला, वो बस इम्तिहान हैं।

हर मोड़ ने मुझसे यही कहा बार-बार,
मत चल इस राह पर, ये दर्द का सफ़र है।
ज़माने ने लाख बुझाने की कोशिश की मगर,
तेरे नाम का दिया अब भी दिल के अंदर है।

हमने तो हर सलाह को चुपचाप ठुकरा दिया,
तेरी एक मुस्कान पर जहाँ को भुला दिया।
तेरी खुशी की ख़ातिर अपने ग़म छुपा लिए,
तन्हाई के हर पल को भी हमने सजा लिया।

लोग कहते हैं मोहब्बत में कुछ हासिल नहीं,
सिर्फ आँसू, तन्हाई और अधूरी दास्ताँ मिलती है।
उन्हें क्या खबर, तेरी यादों के सहारे ही तो,
इन वीरान रातों को जीने की वजह मिलती है।

न कोई शिकवा है, न कोई गिला बाकी है,
तेरी याद ही अब मेरी सबसे बड़ी साथी है।
किस्मत की लकीरों का फैसला जो भी हो,
हर धड़कन पर आज भी तेरा ही नाम लिखा है।

— योगिता तिवारी

उत्तर प्रदेश

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