राज्यसभा जाएंगे नीतीश, बिहार में बदलेगा नेतृत्व? ओमप्रकाश राजभर के दावों से तेज हुई सियासी चर्चा

- अखिलेश कुमार
लखनऊ/पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। लंबे समय से राज्य की कमान संभाल रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है। गुरुवार को उन्होंने नामांकन दाखिल किया और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट कर दिया कि वे अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव के समय ही तय कर लिया गया था।
चुनाव के वक्त ही तय हो गया था फार्मूला: राजभर
राजभर के मुताबिक, चुनाव के दौरान यह सहमति बनी थी कि आगे चलकर नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जाएंगे और बिहार में मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से होगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर भी चर्चा हुई थी। राजभर के अनुसार, उन्हें या तो जेडीयू कोटे से उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है या फिर राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राजभर ने कहा कि यह पूरा सियासी समीकरण पहले से तय था और अब वही अमल में लाया जा रहा है।
क्या जनता इस बदलाव को स्वीकार करेगी?
जब उनसे पूछा गया कि क्या बिहार की जनता इस बदलाव को स्वीकार करेगी, तो राजभर ने कहा कि जनता ने पांच साल के लिए जनादेश दिया है और सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। उनके मुताबिक, आगे जनता कामकाज के आधार पर फैसला करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल कर सरकार बना रही है और बिहार में भी जनता ने इस व्यवस्था को स्वीकार किया है।
राज्यसभा जाने का ऐलान
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि राज्यसभा जाने के बावजूद उनका बिहार की जनता से जुड़ाव बना रहेगा। पिछले कई दिनों से उनके केंद्र की राजनीति में जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।
हालांकि, बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की ओर से किसे नेतृत्व सौंपा जाता है।
फैसले का विरोध भी शुरू
नीतीश कुमार के इस निर्णय का कुछ समर्थकों ने विरोध भी किया है। पटना में उनके आवास के बाहर जेडीयू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर उन्हें मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कदम जनादेश की भावना के विपरीत है और उन्हें अपना निर्णय बदलना चाहिए।
बिहार की सियासत में आए इस नए मोड़ से आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और तेज होने के आसार हैं।



