
लोकतंत्र की जीत बताते हुए सपा प्रमुख ने महिला आरक्षण और जातीय जनगणना पर रखी अपनी बात
- अखिलेश कुमार अग्रहरि
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकसभा में परिसीमन बिल पास न होने को भाजपा सरकार की “बदनीयती की हार” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन है और इस बिल का गिरना लोकतंत्र की जीत है। उनके अनुसार किसी भी प्रस्ताव की हार का मतलब है कि सरकार जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही, जबकि विपक्ष जनता की आवाज उठा रहा है।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी राजनीति का आधार समाज में दरार पैदा करना है। उन्होंने कहा कि भाजपा लोगों को बांटकर अविश्वास का माहौल बनाती है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी इसके खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे जल्दबाजी में लाने का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि जब तक जातीय जनगणना नहीं होगी, तब तक आरक्षण का सही लाभ नहीं मिल पाएगा। उनके अनुसार “जब गिनती ही सही नहीं होगी, तो आरक्षण भी सही कैसे होगा।”
अखिलेश यादव ने कहा कि महिला आरक्षण में पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जातीय जनगणना से बचना चाहती है और समाज को छोटे-छोटे वर्गों में बांटकर अपने फायदे के लिए निर्णय लेना चाहती है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा। साथ ही कहा कि महिलाओं को आज भी सामाजिक और मानसिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उनके लिए ठोस और समावेशी नीति की जरूरत है।
सपा प्रमुख ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए उनकी पार्टी प्रतिबद्ध है और किसी भी वर्ग का हक छीने जाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर महिलाओं को अधिक अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने फतेहपुर के एक चाय विक्रेता आर्यन यादव से जुड़ी घटना का भी जिक्र किया और उसे तांबे के बर्तनों का सेट भेंट किया। साथ ही निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
अंत में अखिलेश यादव ने अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्ष 2027 में प्रदेश में उनकी सरकार बनने पर परशुराम जयंती पर अवकाश पुनः घोषित किया जाएगा।


