HomeNEWSफसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण हुआ प्रारंभ

फसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण हुआ प्रारंभ

कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर में किसानों को फसल अवशेष न जलाने, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली छूट और अवशेषों से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की दी गई जानकारी

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन और इसके पर्यावरणीय एवं कृषि संबंधी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने प्रतिभागी किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों को खेत में जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन कर मृदा की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध कराए जा रहे विभिन्न कृषि यंत्रों और उन पर मिलने वाली छूट के बारे में भी किसानों को जानकारी दी गई। किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि पराली और अन्य फसल अवशेष जलाने से मानव स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है।

कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को फसल अवशेषों से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी। इसके अलावा फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग के माध्यम से गुणवत्तायुक्त मशरूम उत्पादन करने की तकनीक के बारे में भी बताया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में शुभम यादव, दिव्यांश और श्री भगवान पाल सहित 25 से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की जाएगी।

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