
छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर साधा निशाना, फीस वृद्धि और निष्कासन वापस लेने की उठी मांग
- शालिनी शर्मा
लखनऊ। फीस वृद्धि का विरोध करने पर लखनऊ विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों प्रेम प्रकाश, प्रिंस प्रकाश और हर्षित शुक्ला को न्याय दिलाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि धरना शुरू होने के बाद भी अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन अथवा सरकार का कोई प्रतिनिधि छात्रों की समस्याएं सुनने या समाधान निकालने के लिए आगे नहीं आया है।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पहुंचकर निष्कासित छात्रों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन सहित गुड्डू खान, पप्पू यादव, निसार हुसैन, विक्की महाजन, आयशा, वंदना शुक्ला, सुमन झा, सर्वेश चौरसिया, सफीक, परवेज, हर्ष, राधा वर्मा, मोहन, मनीष सिंह, कल्लू सोनकर, शिव गुड्डू सोनकर और भारती रावत समेत अनेक लोगों ने धरने में सहभागिता की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों की मांगों को अनदेखा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्कासन के निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा फीस वृद्धि के मुद्दे पर छात्रों से संवाद स्थापित करने की मांग की।
धरना स्थल पर पहुंचीं पं. शर्मिला महाराज ने अभिभावकों और समाज के विभिन्न वर्गों से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में अभिभावकों को पहुंचकर छात्रों के पक्ष में आवाज उठानी चाहिए।
शर्मिला महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही फीस वृद्धि और निष्कासन के आदेश वापस नहीं लिए गए तो समाजवादी पार्टी के सांसद और विधायक इस मुद्दे को संसद तथा विधानसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस विषय पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।


