गणित को रोचक बनाने का अनोखा प्रयोग, अजय और रूबी रहे अव्वल


जिला संसाधन केंद्र (डाइट) में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में गणित को रोचक और सरल बनाने के लिए शिक्षकों ने कठपुतली के माध्यम से शिक्षण का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में अजय कुमार तिवारी और रूबी ने सर्वोत्तम प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- विवेक कुमार
कानपुर देहात। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पुखरायां में बुधवार, 25 सितम्बर 2025 को कला, क्राफ्ट एवं पपेट्री आधारित शिक्षण प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस अनोखे प्रयोग का उद्देश्य गणित सहित अन्य विषयों को बच्चों के लिए रोचक, सरल और समझने योग्य बनाना रहा।
प्रतियोगिता राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशन में आयोजित हुई, जिसमें जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिता के परिणाम
- प्राथमिक स्तर (गणित): अजय कुमार तिवारी, प्रा.वि. विचितारया सखनखेड़ा – प्रथम स्थान
- प्राथमिक स्तर (भाषा/हिन्दी): मनीषा पराशर, प्रा.वि. नाहर अकबरपुर – प्रथम स्थान
- उच्च प्राथमिक स्तर (गणित): रूबी दीक्षित, उ.प्रा.वि. अतियारायपुर – प्रथम स्थान
- उच्च प्राथमिक स्तर (विज्ञान): कोमल कटियार, उ.प्रा.वि. अकबरपुर – प्रथम स्थान
- उच्च प्राथमिक स्तर (सामाजिक विज्ञान): आभा अवस्थी, कम्पोजिट विद्यालय भोगनियापुर, अकबरपुर – प्रथम स्थान
विशेष आकर्षण
- प्रतियोगिता में कठपुतली और शैक्षिक सामग्री (टीएलएम) के माध्यम से शिक्षण प्रस्तुतियां दी गईं।
- निर्णायकों ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में जिज्ञासा जगाने और कठिन विषयों को सरल बनाने में बेहद सहायक होती हैं।
- डायट प्राचार्य राजेश कुमार वर्मा ने अपने संबोधन में कहा – “यदि शिक्षक बच्चों की समझ के अनुसार शिक्षण सामग्री तैयार कर उसका प्रयोग करें, तो शिक्षा और अधिक प्रभावी बन जाएगी।”
सम्मान और सहभागिता
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता का संचालन संतोष कुमार सरोज (प्रवक्ता कला) ने किया, जबकि सहसंचालन में डॉ. प्राची शर्मा, डॉ. जगदम्बा त्रिपाठी, विनीता प्रकाश, विपिन शान्त, मोनिका गुप्ता, मो. इमरान, अंजना यादव और डॉ. अनिल जैन मौजूद रहे।
इस मौके पर बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षण विशेषज्ञ उपस्थित रहे और कला व पपेट्री आधारित शिक्षण के महत्व पर जोर दिया।



