8वें वेतन आयोग के लागू होने में देरी, सैलरी में 30-40% तक बढ़ोतरी की संभावना

- सोनाली सिंह
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसके सदस्यों और टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। ToR आयोग के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों को तय करता है और यह निर्धारित करता है कि आयोग किन पहलुओं पर विचार करेगा।
8वें वेतन आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और पेंशन संरचना में बदलाव करना है। हालांकि लागू होने में देरी हो सकती है, कर्मचारियों को रेट्रोस्पेक्टिव लाभ 1 जनवरी 2026 से मिलेगा।
कौन से भत्ते खत्म या मिल सकते हैं?
पिछले वेतन आयोग की तरह इस बार भी कुछ भत्तों में बदलाव की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यात्रा भत्ता, विशेष ड्यूटी भत्ता और छोटे क्षेत्रीय भत्ते खत्म किए जा सकते हैं या बड़े भत्तों में शामिल किए जाएंगे, ताकि सैलरी संरचना सरल और पारदर्शी हो सके।
फिटमेंट फैक्टर पर आधारित सैलरी वृद्धि
वेतन वृद्धि का आधार होगा ‘फिटमेंट फैक्टर’, जो बेसिक पे पर लागू किया जाएगा। विश्लेषकों के अनुसार यह फैक्टर 1.83 से 2.86 के बीच रह सकता है, जिससे सैलरी में 13% से 34% तक बढ़ोतरी संभव है।
वर्तमान में कर्मचारियों को 55% महंगाई भत्ता (DA) मिल रहा है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद DA शून्य होकर बेसिक पे में जोड़ दिया जाएगा। इसका असर यह होगा कि शुरुआती बढ़ोतरी सीमित लगेगी, लेकिन दीर्घकालिक लाभ अधिक मिलेगा क्योंकि पेंशन भी बेसिक पे और DA पर आधारित होती है।
लागू होने का अनुमान
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले अनुभवों के आधार पर आयोग की सिफारिशें 2028 की शुरुआत तक लागू हो सकती हैं, लेकिन बढ़ी हुई सैलरी और बकाया लाभ 1 जनवरी 2026 से गिना जाएगा।
इस बदलाव से लगभग 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगी सीधे लाभान्वित होंगे। कुल मिलाकर एक करोड़ से ज्यादा लोगों की आय और पेंशन संरचना पर इसका असर पड़ेगा।
उम्मीदें
कर्मचारी और पेंशनर्स उम्मीद कर रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग बेसिक सैलरी, पेंशन, महंगाई भत्ता (DA) और अन्य भत्तों को मिलाकर सैलरी संरचना को और अधिक सरल, पारदर्शी और लाभकारी बनाएगा।



