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विराट दंगल में पहलवानों ने दिखाया दमखम, विजेता पहलवानों का डॉ. संदीप ने किया सम्मान

झांसी के अंजनी माता मंदिर के पास सजा कुश्ती का अखाड़ा, विभिन्न जिलों और राज्यों से पहुंचे पहलवानों ने दिखाया शानदार कौशल

  • नरेश राठौर

झांसी। अंजनी माता मंदिर के पास 5 सितंबर 2026 को विराट दंगल का आयोजन किया गया। दंगल में झांसी सहित विभिन्न जिलों और राज्यों से पहुंचे पहलवानों ने अखाड़े में अपने दमखम और कुश्ती कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे और पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य अतिथि डॉ. संदीप सरावगी रहे। उन्होंने अखाड़े में पहुंचकर पहलवानों का उत्साहवर्धन किया और विजेता पहलवानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कुश्ती हमारी पारंपरिक खेल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजन न केवल इस खेल की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरित करने का भी काम करते हैं।

दंगल में विभिन्न स्थानों से आए पहलवानों के बीच कई रोमांचक मुकाबले हुए। राधे (करारी), होमी पंडित (दतिया), कपिल (बबीना), मोनिका राणा (हरियाणा), शिवराज पहलवान, सत्येंद्र (पीताम्बरा) एवं संस्कार (उपासी बाबा) सहित कई पहलवानों ने अपने-अपने मुकाबलों में जीत दर्ज कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

वहीं हुकुम पहलवान (हमीरपुर), धर्मेंद्र खटीक, जतिन पहलवान (देवलाल चौथे), मोनू पहलवान, बीरन पहलवान (दतिया), मंगल पहलवान (डिकौली), जयवीर (देवलाल), दीपू पहलवान (पानीपत, हरियाणा), संजय (इंदौर) एवं जितेंद्र सहित अन्य पहलवानों ने भी अखाड़े में अपनी प्रतिभा और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन किया।

दंगल के दौरान पहलवानों के बीच हुए मुकाबलों में जोरदार दांव-पेच देखने को मिले। दर्शकों ने तालियों और उत्साहवर्धन के साथ पहलवानों का मनोबल बढ़ाया। विजेता पहलवानों को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

दंगल के संयोजक रमाकांत पहलवान (बुंदेलखंड केसरी) रहे, जबकि चंद्रप्रकाश (बबीना) ने रैफरी की भूमिका निभाई। आयोजन को सफल बनाने में कमलेश यादव बोड़ा, आकाश साहू, राजीव, काजू मास्टर, शाजिद खान, संजीव, मोन्टी साहू सहित अन्य कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

आयोजकों ने बताया कि विराट दंगल आयोजित करने का उद्देश्य क्षेत्र में कुश्ती को बढ़ावा देना और युवा पहलवानों को बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण एवं उभरती प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

दंगल के समापन पर विजेता पहलवानों का सम्मान किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। आयोजन ने क्षेत्र में पारंपरिक कुश्ती के प्रति लोगों की रुचि और उत्साह को भी सामने रखा।

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