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विश्व स्तनपान सप्ताह: माताओं और नर्सिंग स्टाफ को स्तनपान के प्रति किया जागरूक

बाल रोग अकादमी कानपुर ने अंजली हॉस्पिटल में आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने बताए मां के दूध के लाभ

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बाल रोग अकादमी कानपुर की ओर से श्याम नगर स्थित अंजली हॉस्पिटल में माताओं एवं नर्सिंग स्टाफ के लिए स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 20 माताओं और नर्सिंग स्टाफ ने सहभागिता कर स्तनपान से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों और शिशु स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष श्रीवास्तव एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रितु श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने माताओं को नवजात शिशु के लिए स्तनपान के महत्व तथा सही पोषण संबंधी जानकारी दी।

डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि आज भी केवल लगभग 50 प्रतिशत माताएं ही अपने शिशु को जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान कराती हैं। उन्होंने कहा कि मां का पहला दूध कोलोस्ट्रम शिशु की पहली वैक्सीन माना जाता है, क्योंकि इसमें रोगों से बचाने वाली महत्वपूर्ण एंटीबॉडीज़ होती हैं। उन्होंने सलाह दी कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान अवश्य शुरू करा देना चाहिए तथा छह माह की आयु तक केवल मां का दूध ही दिया जाए। इस अवधि में शिशु को घुट्टी, शहद, पानी या अन्य कोई आहार नहीं देना चाहिए।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रितु श्रीवास्तव ने बताया कि बोतल से दूध पिलाने या अनावश्यक रूप से ऊपर का दूध देने से शिशुओं में डायरिया, निमोनिया, एलर्जी और दमा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि छह माह की आयु पूरी होने के बाद मां के दूध के साथ-साथ ठोस पूरक आहार, विशेषकर अनाज, देना शुरू करना चाहिए, जिससे शिशु को पर्याप्त कैलोरी और पोषण मिल सके तथा उसका समुचित शारीरिक विकास हो।

बाल रोग अकादमी कानपुर के सचिव डॉ. शैलेंद्र गौतम ने कहा कि अधिकांश सामान्य बीमारियों की स्थिति में भी मां अपने शिशु को स्तनपान करा सकती है। उन्होंने बताया कि कामकाजी महिलाएं अपना दूध निकालकर स्वच्छ तरीके से फ्रिज में सुरक्षित रख सकती हैं, जिसे 24 घंटे तक शिशु को पिलाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने माताओं को स्तनपान से जुड़े भ्रमों को दूर करने, नवजात के बेहतर स्वास्थ्य और कुपोषण की रोकथाम के लिए केवल मां के दूध को सर्वोत्तम आहार अपनाने का संदेश दिया।

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