हम रात रात जागे, चैन से सोए वो!!
करके बेचैन हमें इस क़दर मासूम बने वो,
हम रात रात जागे, चैन से सोए वो!!
ख़ैर समझिए इस दिल की जो लोहे का था
चोट भरपूर थी, देने वाले भी तो, थे वो!!
उनकी हसरत बनने की सज़ा ही तो है अब यह
हम जी भी रहे हैं, जीने देते भी नहीं वो!!
बात थी कुछ ऐसी जो ज़ुबां से कही ना गई हमसे
मौन था, दिल की हलचल शायद समझते थे वो!!
हमसे तो ये भी नहीं पूछा कि कैसे हैं हालात अब
बस अपनी क़ैफ़ियत में जीते ही गए वो!!
वक्त के सीने पर निशान बनाने चले थे हम
हाथ थामा भी उन्होंने, और जुदा भी रहे वो!!
चलकर कुछ कदम साथ, आगे निकल गए
कहें भी तो कैसे कहें, ख़ुदग़र्ज़ तो हैं नहीं वो!!
हमने भी बना लिया है आशियाना उनके दिल में
निकालकर बाहर हमें, अब जीएं भी कैसे वो!!
क्यूँकर नहीं होती इस दिल को राहत ए राही
हाथ भी तो पकड़कर चल रहे हैं ना वो!!
किससे कहें इस दिल का फ़साना ए ज़िंदगी
अब उनसे हम आबाद हैं, और हमसे वो!
कुछ दुआएं निकली थीं दिल से इस बाबत
कि हम चाहे बर्बाद रहें, चैन से रहें वो!!



