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सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

लंबे समय तक चले रिश्ते के मामले में आरोपी को मिली अग्रिम जमानत

  • समय टुडे डेस्क।

लाहाबाद हाईकोर्ट ने एक रेप मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि बालिगों के बीच सहमति से लंबे समय तक बना शारीरिक संबंध बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता।

यह टिप्पणी जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ द्वारा आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई। कोर्ट ने आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आरोपी को झूठे मामले में फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि यदि बालिगों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे हैं, तो उसे बलात्कार नहीं माना जा सकता।

मामला उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से जुड़ा है, जहां सिधारी थाने में आरोपी के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, महिला के साथ उसका लंबे समय से संबंध था, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद महिला ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी को राहत देते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

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