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“लोग कहते हैं कि हम अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन…”

लेकिन सच यह है कि आज भी कई सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कहीं बच्चों को ठंडा पीने का पानी नहीं मिलता, कहीं सभी कक्षाओं में पंखे नहीं हैं, कहीं बिजली की समस्या है, तो कहीं हर विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

जो शिक्षक हैं, उन्हें भी केवल पढ़ाने का अवसर नहीं मिल पाता। कभी चुनाव ड्यूटी, कभी जनगणना, कभी सर्वे और कभी अन्य प्रशासनिक कार्यों में उनकी ड्यूटी लगा दी जाती है।

ऐसे में अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों को महंगे निजी विद्यालयों में भेजने को विवश हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता होती है।

लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि सरकारी स्कूलों में प्रतिभा की कमी है। सरकारी विद्यालयों के हजारों बच्चे हर वर्ष डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, शिक्षक, वैज्ञानिक और खिलाड़ी बनकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

आवश्यकता है कि सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए और शिक्षा को वास्तव में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

जब सरकारी स्कूल मजबूत होंगे, तभी समाज के हर वर्ग के बच्चे को समान अवसर मिलेगा।

“बच्चों का भविष्य फीस से नहीं, अच्छी शिक्षा और समान अवसरों से बनता है।”

~ राखी गंगवार ( शिक्षिका )

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