
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 61 मामलों की जनसुनवाई की, 17 जिलों के पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील पुलिसिंग का दिया प्रशिक्षण
- ज्योति सिंह
कानपुर नगर। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय तक उनकी त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग एवं कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला ‘शक्ति और सुरक्षा : एडवांस जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग’ का शुभारंभ नागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम में हुआ। कार्यक्रम में कानपुर जोन सहित प्रदेश के 17 जनपदों से आए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर तथा विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान रहीं। इस अवसर पर पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल, आईजी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSA) सुभाष चंद्र दुबे तथा अपर पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) संकल्प शर्मा ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान ‘कंपैशनेट कॉप : शक्ति और सुरक्षा’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
अपने संबोधन में विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के लिए थाना केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि न्याय की पहली उम्मीद होता है। ऐसे में पुलिस का व्यवहार संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और विश्वास जगाने वाला होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग के पास कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि पीड़ित महिलाओं को थानों में अनावश्यक रूप से बैठाकर रखा जाता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इस प्रकार की शिकायतों को गंभीरता से लेने और थानों में महिलाओं के लिए सम्मानजनक एवं सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि कानून का पालन जितना आवश्यक है, उतनी ही संवेदनशीलता भी जरूरी है। विशेष रूप से पति-पत्नी से जुड़े विवादों में पुलिस को धैर्यपूर्वक कार्य करते हुए यथासंभव आपसी सुलह एवं समाधान का प्रयास करना चाहिए तथा आवश्यक होने पर ही मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के समानांतर सर्किट हाउस में आयोजित जनसुनवाई में विजया रहाटकर ने महिलाओं से जुड़े 61 मामलों की सुनवाई की। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का त्वरित, निष्पक्ष एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग, पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण, संवेदनशील व्यवहार, निष्पक्ष विवेचना, महिला अधिकार, लैंगिक समानता तथा महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण एवं संवाद सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
आयोजकों ने बताया कि ‘शक्ति और सुरक्षा’ प्रशिक्षण श्रृंखला की शुरुआत 9 और 10 जून को गाजियाबाद से हुई थी तथा इसका दूसरा चरण कानपुर में आयोजित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य पुलिस बल को महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और पीड़ित-केंद्रित बनाना है, ताकि महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सके।


