
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 27 मेधावियों को 33 पदक किए प्रदान, नवाचार और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का किया आह्वान
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर के कैलाश भवन ऑडिटोरियम में शनिवार को विश्वविद्यालय का 28वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने की। इस अवसर पर 27 मेधावी विद्यार्थियों को 33 पदक एवं पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि कुल 372 छात्र-छात्राओं को विभिन्न संकायों की उपाधियां प्रदान की गईं।
समारोह में 69 विद्यार्थियों को पीएचडी, 179 को बीएससी (कृषि), 28 को बीएससी (उद्यान), 19 को बीएससी (फॉरेस्ट्री), 10 को बीएससी (कम्युनिटी साइंस), 52 को बीटेक की विभिन्न शाखाओं में, 8 को बीएफएससी तथा 7 विद्यार्थियों को बीटेक (डेयरी टेक्नोलॉजी) की डिग्री प्रदान की गई। उपाधियां और पदक प्राप्त कर छात्र-छात्राओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 9 विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 9 को विश्वविद्यालय रजत पदक, 9 को विश्वविद्यालय कांस्य पदक तथा 6 विद्यार्थियों को प्रायोजित स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कुल 33 पदकों में से 19 पदक छात्रों और 14 पदक छात्राओं ने प्राप्त किए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इंद्र मणि पाण्डेय, महासचिव (बिम्सटेक) ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सीएसए विश्वविद्यालय ने दलहन, तिलहन एवं खाद्यान्न फसलों की 300 से अधिक उन्नत प्रजातियां विकसित कर कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के अनुरूप नई कृषि प्रजातियों के विकास तथा कृषि विविधीकरण पर विशेष बल दिया।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि देश को युवाओं के नवाचारों की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के लिए वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, श्रीअन्न (मिलेट्स) के उत्पादन में वृद्धि, कृषि लागत कम करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों और नवाचारों को किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने 372 डिग्रियों को डिजिलॉकर पर अपलोड किए जाने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। साथ ही विभिन्न विद्यालयों के प्रतियोगिता विजेता छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र, पुस्तकें, बैग एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। फर्रुखाबाद की पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट प्रदान की गई तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति मिल चुकी है तथा विश्वविद्यालय पुस्तकालय के आधुनिकीकरण के लिए 3.5 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों की सुविधा के लिए रेलवे के सहयोग से यात्रा में विशेष रियायत की व्यवस्था भी की गई है।
दीक्षांत समारोह के दौरान उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए चार शिक्षकों को “उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान” से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित 9 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनीता सिंह एवं डॉ. नौशाद खान ने संयुक्त रूप से किया।
समारोह में विधान परिषद सदस्य एवं विश्वविद्यालय बोर्ड के सदस्य सलिल विश्नोई, जिला प्रशासन के अधिकारी, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


