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मानसून और पीरियड्स: बरसात में महिलाओं की सेहत और स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान

— लेखिका: बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात अध्यापिका

मानसून अपने साथ हरियाली, ठंडी हवाएं और राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम महिलाओं और किशोरियों के लिए मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान अतिरिक्त सावधानी की मांग भी करता है। बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे निजी अंगों में संक्रमण, खुजली, रैशेज, दुर्गंध और एलर्जी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) का विशेष ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड को हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए, चाहे रक्तस्राव कम ही क्यों न हो। लंबे समय तक एक ही पैड का उपयोग करने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यदि टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग किया जा रहा है, तो उसकी नियमित सफाई और सही तरीके से स्टेरिलाइजेशन करना जरूरी है। उपयोग के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना भी संक्रमण से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय है।

बरसात के मौसम में सूती (कॉटन) और ढीले अंतःवस्त्र पहनना सबसे बेहतर माना जाता है। यदि बारिश में कपड़े भीग जाएं तो उन्हें तुरंत बदल लेना चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से फंगल संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। शरीर को साफ, सूखा और स्वच्छ रखना इस मौसम में सबसे प्रभावी सुरक्षा है।

पीरियड्स के दौरान संतुलित आहार भी उतना ही जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना, आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना तथा मौसमी फल और हरी सब्जियां खाना शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और कमजोरी से बचाता है। हल्की शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त आराम भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

आज भी समाज के कई हिस्सों में मासिक धर्म को लेकर झिझक और भ्रांतियां बनी हुई हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक किशोरियां जागरूकता के अभाव में अस्वच्छ साधनों का उपयोग करती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए परिवार, विद्यालय और समाज की जिम्मेदारी है कि वे मासिक धर्म को एक सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करें और इसके बारे में खुलकर बातचीत करें।

एक शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में मेरा अनुभव है कि जब किशोरियों को सही जानकारी, सुरक्षित सैनिटरी उत्पाद और परिवार का सहयोग मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। मासिक धर्म किसी भी लड़की की शिक्षा, सपनों या प्रगति में बाधा नहीं बनना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि हम ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां हर बेटी बिना किसी संकोच के अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सके।

मानसून का आनंद तभी पूर्ण है, जब स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे। आइए, इस बरसात हम स्वयं भी मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक बनें और अपने परिवार, विद्यालय तथा समाज की बेटियों और महिलाओं को भी इसके प्रति जागरूक करें। स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।

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