सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ इंडिया गेट पर विरोध— आवारा कुत्तों को हटाने पर भड़की नाराज़गी

- नेहा पाठक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ रविवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आदेश “पशु कल्याण की भावना के खिलाफ” है और इससे समस्या हल होने के बजाय और बढ़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को बढ़ते डॉग-बाइट (कुत्ते के काटने) मामलों को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाएँ।
विरोध में शामिल एक प्रतिभागी ने एएनआई से कहा,
“मैं खुद को सिर्फ कुत्ता प्रेमी नहीं, बल्कि इंसानियत का समर्थक मानता हूँ। सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी रिपोर्टों के आधार पर यह आदेश दिया है। जब उनके पास असली मुद्दों — प्रदूषण, बेरोजगारी और शासन की नाकामियों — के जवाब नहीं होते, तो ऐसे विषय उठाए जाते हैं जहाँ जानवरों को तकलीफ़ होती है क्योंकि वे बोल नहीं सकते।”
उन्होंने आगे कहा कि कुत्तों को स्थानांतरित करने की बजाय वैज्ञानिक समाधान अपनाने की ज़रूरत है —
“सरकार को नसबंदी और टीकाकरण के ज़रिए समस्या हल करनी चाहिए, न कि उन्हें जबरन हटाने के आदेश देकर।”
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ — न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया — ने अपने आदेश में कहा था कि सभी सार्वजनिक परिसरों को बाड़बंद किया जाए ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पकड़े गए कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, क्योंकि ऐसा करने से “निर्देश का मूल उद्देश्य विफल” हो जाएगा।
पीठ ने स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे इन कुत्तों को एकत्र कर पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के तहत टीकाकरण और नसबंदी के बाद उन्हें निर्धारित डॉग शेल्टर में भेजें। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।



