
- मनीष कुमार
कानपुर नगर। एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया की यूपी एएसआईकॉन-2025 में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि पिछले 20 वर्षों में पुरुषों में नपुंसकता के रोगी 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसका मुख्य कारण अत्यधिक मानसिक तनाव और सोशल मीडिया पर फैल रहे यौनवर्धक नुस्खों का सेवन बताया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि इस अवधि में पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और क्वालिटी दोनों में गिरावट देखी गई है। अत्यधिक मानसिक तनाव पिट्यूटरी ग्रंथि के हार्मोनल रिसाव को प्रभावित करता है, जो सीधे अंडकोष और शुक्राणु निर्माण पर असर डालता है।
डॉ. मो. असलम ने बिठूर के एक होटल में यूपी एएसआईकॉन के दूसरे दिन बताया कि अंडकोष के कार्य को प्रभावित करने वाले हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरोन, एफएसएच और एलएच का संतुलन बिगड़ने पर स्पर्म काउंट घट जाता है। इसके चलते यदि दंपती संतान नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं, तो पति-पत्नी दोनों की जांच कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लो स्पर्म काउंट के मामलों में विशेष तकनीक अपनाने पर लगभग 29% केस में गर्भधारण संभव है।
डॉ. असलम ने आगे बताया कि पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर, जेनेटिक डिसऑर्डर, नशे का सेवन (धूम्रपान, गांजा) और खुद से मेडिकल स्टोर की दवाओं का उपयोग भी स्पर्म काउंट और क्वालिटी को प्रभावित करता है। सोशल मीडिया पर बताए जा रहे गलत नुस्खों से भी युवाओं में समस्या बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि सही निदान और चिकित्सकीय इलाज से बांझपन का शिकार लोग अब ठीक हो रहे हैं, और इस दिशा में जागरूकता जरूरी है।



