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टीबी मुक्त भारत अभियान को मिला बल, आईएमए ने 100 क्षय रोगियों को वितरित की पौष्टिक आहार किट

जिलाधिकारी ने किया पोटली वितरण, वर्ष 2030 तक टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने का आह्वान

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर शाखा द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत निर्धन क्षय रोगियों को पौष्टिक आहार किट (पोटली) वितरित की गई।

आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन अभियान के अंतर्गत आईएमए कानपुर द्वारा ‘निक्षय मित्र’ पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 100 जरूरतमंद क्षय रोगियों को पौष्टिक आहार किट उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि पोषण और समय पर उपचार टीबी से लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी कानपुर नगर जितेंद्र प्रताप सिंह ने मरीजों को पौष्टिक आहार किट वितरित करते हुए कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को समाप्त करने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने मरीजों को नियमित उपचार एवं पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर आईएमए की ओर से निजी चिकित्सकों से भी अपील की गई कि ऐसे मरीज जिनका वजन तेजी से कम हो रहा हो, लगातार बुखार रहता हो या लंबे समय से बलगम के साथ खांसी की समस्या हो, उनकी टीबी की जांच अवश्य कराई जाए। विशेष रूप से बलगम की जांच एवं छाती का एक्स-रे कराकर मरीजों को निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत किया जाए, जिससे उन्हें सरकार की ओर से निःशुल्क उपचार और पोषण सहायता मिल सके।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुबोध प्रकाश उपस्थित रहे। उन्होंने टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि समय पर जांच और नियमित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम का संचालन आईएमए कानपुर की सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने किया। इस अवसर पर डॉ. किरण सिन्हा, डॉ. शरद दामेले, डॉ. गुल शगुफ्ता सहित अनेक चिकित्सक एवं आईएमए के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों और जनजागरूकता के माध्यम से प्रधानमंत्री के वर्ष 2030 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त किया जा सकेगा।

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