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उज्जैन: महाकाल मंदिर में 2026 से ‘अजगर मालाएं’ और मुण्डमाल चढ़ाने पर रोक, मंदिर समिति का बड़ा फैसला

  • ऋषभ कुमार

उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अब भारी-भरकम ‘अजगर मालाएं’ और मुण्डमाल चढ़ाने की परंपरा बंद होने जा रही है। मंदिर प्रबंध समिति ने एएसआई एवं जीएसआई की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए 1 जनवरी 2026 से इन मालाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम शिवलिंग के संभावित क्षरण को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

शिवलिंग संरक्षण के लिए लिया गया निर्णय

मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार कुछ मालाएं 10–15 किलो तक भारी होती हैं, और इन्हीं से संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इस वजह से समिति ने निर्णय लिया है कि अब भगवान महाकाल का श्रृंगार केवल मंदिर प्रशासन द्वारा ही किया जाएगा। दुकानदारों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे भारी मालाएं न बनाएं और न ही बेचें।

मंदिर परिसर में आजकल लगातार घोषणा की जा रही है कि भक्त ‘अजगर माला’ न खरीदें। नए साल से सुरक्षा कर्मचारी भी सभी द्वारों पर पूजन सामग्री की जांच करेंगे और भारी मालाओं को प्रवेश से पहले ही अलग रखवा दिया जाएगा।

एएसआई–जीएसआई और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल शिवलिंग के क्षरण की जांच के लिए एएसआई और जीएसआई की संयुक्त टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने शिवलिंग की सुरक्षा हेतु छोटी फूलमाला और सीमित मात्रा में ही फूल अर्पण करने की सलाह दी थी। बाजार में बिकने वाली ये भारी अजगर मालाएं 500 से 2100 रुपये तक की होती थीं और श्रद्धालु इन्हें सीधे शिवलिंग पर चढ़ाते थे।

भस्म आरती में उमड़ा भक्तों का सैलाब

बुधवार तड़के हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। त्रिपुंड और भस्म रमाकर भगवान को श्री गणेश स्वरूप में अलंकृत किया गया, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।

पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के दौरान पंचामृत, फलों के रस और पारंपरिक विधि से भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई और नवीन मुकुट धारण कराया गया।

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