मल्लिकार्जुन खड़गे बोले—संविधान की संरचना बदलने की कोशिश; सरकार ने आरोपों को नकारा
- नेहा पाठक
नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद में राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सत्तारूढ़ एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष महिला विरोधी नहीं है, बल्कि सरकार विधेयक के जरिए व्यापक बदलाव लाना चाहती है।
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए खड़गे ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लंबे समय से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2023 के संशोधन का समर्थन भी सर्वसम्मति से किया गया था, लेकिन मौजूदा विधेयक में परिसीमन से जुड़े प्रावधान जोड़कर इसे जटिल बना दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को जोड़कर ऐसे प्रावधान लाना चाहती है, जिससे भविष्य में साधारण बहुमत के आधार पर कानूनों में बदलाव किया जा सके। खड़गे ने कहा कि यह संविधान की मूल संरचना को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। मतदान में 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया, जिसके चलते यह पारित नहीं हो पाया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पुष्टि की कि विधेयक संवैधानिक मानकों को पूरा नहीं कर सका। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इससे जुड़े अन्य विधेयकों पर आगे विचार नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने के फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जिससे संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी हुई है।


