HomeNEWSलोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका, राजनीतिक घमासान तेज

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अटका, राजनीतिक घमासान तेज

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा—पुराना बिल लाएं, हम देंगे समर्थन; सरकार और विपक्ष आमने-सामने

  • नेहा पाठक

नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 विशेष सत्र के दौरान पारित नहीं हो सका, जिसके बाद सत्तारूढ़ पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पहले से व्यापक सहमति प्राप्त महिला आरक्षण विधेयक को दोबारा पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पुराना विधेयक लाती है, तो विपक्ष उसका समर्थन करने के लिए तैयार है।

उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि संसद का सत्र बुलाकर विधेयक पेश किया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन इसके पक्ष में है और कौन विरोध में।

इस विधेयक को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। मतदान के दौरान 298 सदस्यों ने समर्थन किया, जबकि 230 सदस्यों ने विरोध में वोट दिया। इसके बाद ओम बिरला ने घोषणा की कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार इससे जुड़े अन्य विधेयकों पर आगे कार्रवाई नहीं करेगी। वहीं भाजपा ने विपक्षी दलों पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाले इस प्रस्ताव को रोकने का आरोप लगाया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, टीएमसी और अन्य दलों पर विधेयक को पारित न होने देने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ने का विरोध करता है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे चुनावी व्यवस्था में बदलाव का प्रयास बताया, जबकि कांग्रेस के अन्य नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताया।

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