वर्तमान में मिल में बचे हैं 113 कर्मचारी, लंबे समय से बंद पड़ी इकाई के कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। कभी कानपुर की औद्योगिक पहचान रही लाल इमली मिल अब अपने अंतिम दौर से गुजर रही है। एक समय हजारों श्रमिकों को रोजगार देने वाली इस प्रतिष्ठित ऊनी वस्त्र इकाई में वर्तमान में मात्र 113 कर्मचारी कार्यरत हैं। आगामी 30 जून को 17 कर्मचारी सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों की संख्या और कम हो जाएगी।
लाल इमली का नाम कभी कानपुर की पहचान हुआ करता था। वर्षों तक यहां की मशीनों की आवाज पूरे क्षेत्र में गूंजती थी और हजारों परिवारों की आजीविका इस मिल से जुड़ी हुई थी। लेकिन समय के साथ मिल की स्थिति लगातार खराब होती गई और वर्ष 2013 से यहां उत्पादन पूरी तरह बंद है।
मिल के बंद होने के बाद कर्मचारियों को वेतन और अन्य देयकों के भुगतान के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। कई बार कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन कर मिल के पुनरुद्धार और बकाया भुगतान की मांग उठाई। विभिन्न सरकारों और जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर मिल को पुनः संचालित करने के आश्वासन भी दिए गए, लेकिन अब तक उत्पादन शुरू नहीं हो सका।
सूत्रों के अनुसार, अब कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) लागू किए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि कपड़ा मंत्रालय ने मिल के कर्मचारियों एवं संपत्तियों का विस्तृत विवरण मांगा है, जिसके बाद वीआरएस योजना को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
मिल कर्मचारियों के बीच इस योजना को लेकर नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से वीआरएस की मांग कर रहे कर्मचारियों का मानना है कि यदि योजना लागू होती है तो उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी।
वर्तमान में शासन स्तर से प्राप्त धनराशि के माध्यम से कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि उत्पादन बंद होने के कारण मिल का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
एक समय कानपुर की औद्योगिक विरासत का प्रतीक रही लाल इमली आज अपने अस्तित्व के संघर्ष से गुजर रही है। ऐसे में कर्मचारियों और शहरवासियों की निगाहें सरकार के अगले कदम और प्रस्तावित वीआरएस योजना पर टिकी हुई हैं।


