HomeNEWSदो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का समापन, जैविक खेती अपनाने का लिया संकल्प

दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का समापन, जैविक खेती अपनाने का लिया संकल्प

कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर में किसानों को किण्वित जैविक खाद एवं प्राकृतिक खेती का दिया गया प्रशिक्षण

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) दिलीप नगर में आयोजित दो दिवसीय किण्वित जैविक खाद (एफओएम) योजनांतर्गत कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में किण्वित जैविक खाद (एफओएम), जीवामृत, बीजामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट के वैज्ञानिक उत्पादन और उपयोग की व्यावहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

समापन सत्र में किसानों को देशी गाय के गोबर एवं गोमूत्र से जीवामृत, बीजामृत तथा मटका खाद तैयार करने और उनके उपयोग की विधियां विस्तार से समझाई गईं। मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने किसानों को केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं, जैविक खेती से संबंधित वित्तीय सहायता तथा प्रमाणन प्रक्रिया की जानकारी दी।

उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित जैविक उर्वरकों के उपयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी के संबंध में भी किसानों को जागरूक किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती एवं किण्वित जैविक खाद को अपनाने का संकल्प लिया।

कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती भविष्य की आवश्यकता है और इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि भूमि की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागी किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की मांग की।

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