पोस्टर, स्लोगन, क्विज प्रतियोगिता और जागरूकता रैली का आयोजन, विशेषज्ञों ने बताया ओआरएस का महत्व
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। भारतीय बाल रोग अकादमी (आईएपी) कानपुर द्वारा विश्व ओआरएस सप्ताह के उपलक्ष्य में हैलट अस्पताल के एनआईसीयू में पैरामेडिकल स्टाफ के लिए पोस्टर, स्लोगन एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमितेश यादव, डॉ. शैलेंद्र गौतम एवं डॉ. प्रशांत प्रियदर्शिनी ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. अमितेश यादव ने कहा कि डब्ल्यूएचओ-ओआरएस (WHO-ORS) डायरिया के उपचार में एक जीवन रक्षक औषधि है, जिसने पिछले दो-तीन दशकों में लाखों बच्चों की जान बचाई है। उन्होंने बताया कि बच्चों को दस्त शुरू होते ही ओआरएस देना शुरू कर देना चाहिए, जिससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) को रोका जा सके और गंभीर स्थिति से बचाव हो सके।
डॉ. प्रशांत प्रियदर्शिनी ने ओआरएस के सही उपयोग, इसकी आवश्यकता और डायरिया के उपचार में इसकी प्रभावशीलता पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. शैलेंद्र गौतम ने क्विज प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों से डब्ल्यूएचओ-ओआरएस और डायरिया से जुड़े प्रश्न पूछे तथा ओआरएस के महत्व और सही उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम के समापन पर एनआईसीयू से बाल रोग विभाग तक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ ने ओआरएस के उपयोग और डायरिया से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया। आयोजन का उद्देश्य डायरिया से होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए ओआरएस के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके समय पर उपयोग का संदेश जन-जन तक पहुंचाना था।


