भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सस्पेंस बरकरार, 36 घंटे बाद भी संयुक्त बयान नहीं; कांग्रेस ने सरकार से मांगी स्पष्टता

- समय टुडे डेस्क।
भारत और अमेरिका के बीच घोषित व्यापार समझौते को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। समझौते की घोषणा के 36 घंटे बीत जाने के बावजूद दोनों देशों की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बुधवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विवरण सार्वजनिक न होने पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने कृषि उत्पादों के आयात को उदार बनाने के संबंध में रियायतें दी हैं, लेकिन सरकार इस पर पारदर्शिता नहीं दिखा रही है।
जयराम रमेश ने एक पोस्ट में लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के 36 घंटे बाद भी कोई आधिकारिक संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। उन्होंने दावा किया कि समझौते की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह पर की गई और यह तुरंत प्रभाव से लागू होने की बात कही गई, लेकिन इसके ठोस विवरण अब तक साझा नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रचार जरूर हो रहा है, लेकिन जानकारी नहीं दी जा रही।
इसी बीच, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी समझौते से जुड़े आंकड़ों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति और व्हाइट हाउस द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए आंकड़े तर्कसंगत नहीं हैं।
मनीष तिवारी ने एक्स पर लिखा कि 500 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार या आयात का दावा समझ से परे है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका को निर्यात 79.44 बिलियन डॉलर और अमेरिका से आयात 38.99 बिलियन डॉलर रहा। ऐसे में आयात को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का दावा अव्यावहारिक प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भारत ने अपने कुल आयात का तीन-चौथाई हिस्सा केवल अमेरिका से लेने की कोई प्रतिबद्धता जताई है।
गौरतलब है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की बात सामने आई है, जिससे राजनीतिक हलकों में विवाद गहरा गया है।
केंद्र सरकार ने इस समझौते को ऐतिहासिक और भविष्य-निर्धारक बताते हुए कहा है कि इससे भारत की विकास गति को बल मिलेगा। वहीं विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की कमी, किसानों और घरेलू उद्योगों पर संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस ने विशेष रूप से कृषि और डेयरी क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर किए गए सरकारी दावों पर सवाल उठाए हैं। साथ ही 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए गए टैरिफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ शून्य कर सकता है और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और अन्य वस्तुओं की खरीद कर सकता है। इन दावों की केंद्र सरकार ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत और अमेरिका इस सप्ताह व्यापार समझौते को लेकर संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, वार्ता टीम समझौते के अंतिम विवरण को लेकर चर्चा के अंतिम चरण में है।
इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की रक्षा की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है।
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से एमएसएमई, इंजीनियरिंग सेक्टर, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने दोहराया कि कृषि और डेयरी क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित हैं और सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।



