‘एपस्टीन फाइल्स’ पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और अमेरिकी बाजार पर जताई चिंता

- अखिलेश अग्रहरि
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी “एपस्टीन फाइल्स” पर चर्चा नहीं करना चाहती। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और भारत के अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर चिंता जाहिर की।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सोशल मीडिया आज एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है और बदलते वैश्विक माहौल में सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइलें काफी समय पहले की होंगी, लेकिन अब सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कई देश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित कर चुके हैं, इसलिए भारत को भी रणनीतिक रूप से सोचने की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के बाजार को विदेशी ताकतों के भरोसे छोड़ना चिंताजनक हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बड़े स्तर पर विदेशी खरीदारी और समझौते किए जा रहे हैं तो “मेक इन इंडिया” और “स्किल इंडिया” जैसे कार्यक्रमों का भविष्य क्या होगा। उनका कहना था कि घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
इस बीच, शुक्रवार को भारतीय युवा कांग्रेस ने “एपस्टीन फाइल्स” से जुड़े आरोपों को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग की। वहीं विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन करते हुए मामले की जांच की मांग उठाई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि उनके पास ऐसी जानकारी है जो अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़ी फाइलों में कुछ भारतीय नामों का उल्लेख करती है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारियों की पुष्टि की जाएगी और सरकार को इस पर स्पष्टता देनी चाहिए।
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने सभी दावों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना तथ्य के आरोप लगा रहा है और इसे राजनीतिक बयानबाज़ी करार दिया।
पुरी ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ राजनीति करनी चाहिए और निराधार आरोपों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार देश के विकास और आर्थिक प्रगति के लिए लगातार काम कर रही है।
यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है, जहां विपक्ष जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है।



