
- नेहा पाठक
नई दिल्ली। जीएसटी परिषद ने 22 सितंबर से लागू होने वाली नई कर संरचना को मंजूरी दे दी है। अब केवल दो स्लैब – 5% और 18% रहेंगे। परिषद ने रिफंड प्रक्रिया और एमएसएमई से जुड़ी औपचारिकताओं को भी आसान बनाने के साथ-साथ जीवन और स्वास्थ्य बीमा को जीएसटी से बाहर कर दिया है।
उद्योग जगत ने इस फैसले को “ऐतिहासिक” और “दूरदर्शी” करार देते हुए कहा है कि इससे कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी, मुकदमेबाजी घटेगी और उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
- सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स घटने से परिवारों को सीधी राहत मिलेगी और विकास को नई रफ्तार मिलेगी।”
- पीएचडीसीसीआई अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा, “टॉयलेटरीज़, पैकेज्ड फूड और बर्तनों जैसी रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स घटकर 5% होने से घरेलू बजट पर बोझ कम होगा और मांग बढ़ेगी।”
- सीआईटीआई अध्यक्ष राकेश मेहरा ने इसे वस्त्र उद्योग के लिए बड़ा कदम बताते हुए कहा, “एमएमएफ फाइबर और धागे पर जीएसटी घटाकर 5% करने से कताई और बुनाई इकाइयों की पूंजी संबंधी दिक्कतें खत्म होंगी। चूंकि 70-80% टेक्सटाइल यूनिट्स एमएसएमई हैं, इसलिए इसका सीधा लाभ उन्हें मिलेगा।”
- एफएचआरएआई अध्यक्ष के श्यामा राजू ने होटल उद्योग को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, “7,500 रुपये तक के होटल कमरों पर टैक्स 5% होने से घरेलू और विदेशी यात्रियों को किफायती ठहराव मिलेगा, जिससे पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।”
क्यों अहम है फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सरलीकृत जीएसटी दर संरचना से न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि कारोबारियों को भी लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितताओं से छुटकारा मिलेगा।



